चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले के हिमालयी जंगलों से वन्यजीव और जैव विविधता से जुड़ी बेहद रोचक जानकारी सामने आई है। करीब 2,000 मीटर की ऊंचाई पर शोधकर्ताओं को ऐसी अनोखी मकड़ी मिली है, जिसकी पीठ पर बना पैटर्न दूर से मुस्कुराते हुए इंसानी चेहरे जैसा दिखाई देता है। खास बात यह है कि एक ही प्रजाति की मकड़ियों में इस चेहरे के 32 अलग-अलग रंग और पैटर्न देखे गए हैं।
Himalayan Happy-Face Spider Found in Chamoli
इस अनोखी मकड़ी की पहचान चमोली के मंडल क्षेत्र में की गई है। इसके अध्ययन और पहचान में वन अनुसंधान संस्थान (FRI) देहरादून के शोधकर्ता आशीर्वाद त्रिपाठी और क्षेत्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय, भुवनेश्वर की वैज्ञानिक देवी प्रियदर्शिनी शामिल रहे। शोधकर्ताओं ने इसकी पीठ पर बने अनोखे पैटर्न के कारण इसे ‘Himalayan Happy-Face Spider’ नाम दिया है।
पीठ पर बना है मुस्कुराते चेहरे जैसा पैटर्न
यह मकड़ी देखने में भले ही सामान्य मकड़ियों जैसी नजर आती हो, लेकिन इसकी पीठ पर बना विशेष पैटर्न इसे बेहद अलग बनाता है। दूर से देखने पर यह पैटर्न किसी मुस्कुराते हुए इंसानी चेहरे जैसा नजर आता है। मकड़ी की पीठ पर लाल, हरे, काले और पीले समेत कई रंग दिखाई देते हैं। वैज्ञानिक इन अलग-अलग रंगों और पैटर्न वाले रूपों को ‘मॉर्फ’ (Morph) कहते हैं।
एक ही प्रजाति में मिले 32 अलग-अलग पैटर्न
इस खोज की सबसे दिलचस्प बात यह है कि शोधकर्ताओं को एक ही प्रजाति की मकड़ियों में 32 अलग-अलग रंग और पैटर्न मिले हैं। आगे पढ़िए..
ये भी पढ़ें:
यानी सभी मकड़ियां एक ही प्रजाति की होने के बावजूद उनकी पीठ पर बने चेहरे जैसे निशान बिल्कुल एक जैसे नहीं हैं। कुछ में रंगों का संयोजन अलग है तो कुछ में चेहरे की आकृति का पैटर्न अलग दिखाई देता है। वैज्ञानिकों के लिए यही विविधता अब शोध का एक महत्वपूर्ण विषय बन गई है।
अदरक प्रजाति के पौधों में मिलती है मकड़ी
शोधकर्ताओं के मुताबिक यह अनोखी मकड़ी अक्सर अदरक प्रजाति के पौधों में पाई जाती है। यह सामान्य मकड़ियों की तरह ही जाला बनाकर अपना जीवन चक्र पूरा करती है। हिमालय के जंगलों में इसकी मौजूदगी क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को भी दर्शाती है।
125 साल पहले हवाई में मिली थी ऐसी मकड़ी
शोधकर्ताओं के अनुसार, इसी तरह की एक मकड़ी की प्रजाति करीब 125 वर्ष पहले हवाई द्वीप में पाई गई थी। अब हिमालयी क्षेत्र में मिली इस मकड़ी ने वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। हालांकि हिमालय में मिली इस मकड़ी के अलग-अलग पैटर्न और इसके विकासक्रम को समझने के लिए अभी और अध्ययन की जरूरत है।
आखिर क्यों बनते हैं मकड़ी की पीठ पर इतने अलग चेहरे?
एक ही प्रजाति में इतने अलग-अलग रंग और पैटर्न का होना वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन पैटर्न के पीछे पर्यावरणीय परिस्थितियों या विकास की प्रक्रिया से जुड़ा कोई कारण हो सकता है। फिलहाल वैज्ञानिक इस बात को समझने की कोशिश कर रहे हैं कि मकड़ी की पीठ पर बनने वाले इन अनोखे पैटर्न का उसके जीवन, व्यवहार या पर्यावरण से क्या संबंध है।