उत्तराखंड ऋषिकेशAIIMS Recruitment Fraud Case Police Search Agency Office

उत्तराखंड: AIIMS में नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा, कंप्यूटर-लैपटॉप जब्त.. जांच के घेरे में मैनेजर और कर्मचारी

एम्स नियुक्ति फर्जीवाड़े मामले में पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने राजदीप इंटरप्राइजेज के कार्यालय से कंप्यूटर, लैपटॉप और डिजिटल दस्तावेज सील किए हैं। स्थानीय मैनेजर विनायक के फरार होने के बाद पुलिस उसकी भूमिका की जांच कर रही है और गिरफ्तारी संभव है।

AIIMS recruitment fraud: AIIMS Recruitment Fraud Case Police Search Agency Office
Image: AIIMS Recruitment Fraud Case Police Search Agency Office (Source: Social Media)

ऋषिकेश: ऋषिकेश एम्स के किच्छा सैटेलाइट सेंटर में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित फर्जी नियुक्तिपत्र जारी करने और अभ्यर्थियों से पैसे मांगने के मामले में पुलिस की जांच तेज हो गई है। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने एम्स परिसर स्थित राजदीप इंटरप्राइजेज के कार्यालय की जांच कर कंप्यूटर, लैपटॉप और अन्य डिजिटल दस्तावेज सील किए हैं। स्थानीय मैनेजर विनायक घटना के बाद से फरार है और उसकी भूमिका की जांच की जा रही है।

AIIMS Recruitment Fraud Case: Police Search Agency Office

जानकारी के अनुसार बृहस्पतिवार को पुलिस और फॉरेंसिक विभाग की टीम ऋषिकेश स्थित एम्स परिसर में राजदीप इंटरप्राइजेज के आउटसोर्स एजेंसी कार्यालय पहुंची। टीम जब कार्यालय पहुंची, उस समय वहां केवल एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मौजूद था। घटना सामने आने के बाद से एजेंसी के अधिकांश कर्मचारी कार्यालय में नहीं पहुंचे हैं। पुलिस ने कार्यालय में मौजूद इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल सामग्री की जांच की। इसके बाद कई कंप्यूटर, लैपटॉप और अन्य डिजिटल दस्तावेजों को सील कर अपने कब्जे में लिया गया है। इनकी फॉरेंसिक जांच के जरिए कथित फर्जी नियुक्तिपत्र तैयार किए जाने और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी।

कर्मचारी सौम्या की भूमिका भी जांच के घेरे में

जांच के दौरान कुछ कथित फर्जी दस्तावेजों पर एजेंसी से जुड़ी कर्मचारी सौम्या के हस्ताक्षर मिलने की बात सामने आई है। हालांकि दस्तावेजों पर उसके हस्ताक्षर किस परिस्थिति में हुए और उसने किसके अधिकार या निर्देश पर हस्ताक्षर किए, यह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस उसकी भूमिका की भी जांच कर रही है। पूछताछ और फॉरेंसिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वह कथित फर्जी नियुक्तिपत्र मामले में किस स्तर तक शामिल थी।

स्थानीय मैनेजर विनायक घटना के बाद से फरार

मामले में राजदीप इंटरप्राइजेज के स्थानीय मैनेजर विनायक की भूमिका को पुलिस संदिग्ध मानकर जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार, घटना सामने आने के बाद से ही विनायक फरार है। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि ऋषिकेश में कथित फर्जी नियुक्तिपत्र जारी करने के लिए विनायक को एजेंसी की ओर से कितने अधिकार दिए गए थे। उपलब्ध तथ्यों और जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ आगे कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी की संभावना से भी इनकार नहीं कर रही है।

गांधी नगर स्थित मुख्य कार्यालय की भी जांच

पुलिस की जांच अब केवल एम्स परिसर स्थित कार्यालय तक सीमित नहीं है। टीम एजेंसी के गांधी नगर स्थित मुख्य कार्यालय और उसके संचालकों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। पुलिस की ओर से मुख्य कार्यालय के दोनों साझेदारों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित फर्जी नियुक्तिपत्र जारी करने की प्रक्रिया में स्थानीय कार्यालय और मुख्य कार्यालय के बीच किस तरह का संपर्क था।

डिजिटल साक्ष्यों से खुल सकते हैं कई राज

पुलिस द्वारा जब्त किए गए कंप्यूटर, लैपटॉप और अन्य डिजिटल दस्तावेज इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इनसे नियुक्तिपत्र तैयार करने, अभ्यर्थियों से संपर्क और कथित लेनदेन से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की जानकारी मिलने की उम्मीद है। पुलिस के मुताबिक, जांच अभी जारी है और संबंधित कर्मचारियों व एजेंसी संचालकों की भूमिका साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी।

सील किए गए डिजिटल दस्तावेज

ऋषिकेश के प्रभारी कोतवाल नवीन जोशी के अनुसार, आउटसोर्स एजेंसी के कार्यालय से लैपटॉप, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल दस्तावेज सील किए गए हैं। स्थानीय मैनेजर विनायक घटना के दिन से फरार है और उसकी भूमिका की जांच की जा रही है। कर्मचारी सौम्या की भूमिका भी जांच के दायरे में है।