चमोली: जनपद चमोली की कर्णप्रयाग विधानसभा को लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन इन दिनों क्षेत्र में उठ रहे जनसमस्याओं के मुद्दे पार्टी के लिए चुनौती बनते दिखाई दे रहे हैं। सिमली में बेस अस्पताल की मांग, नैनीसैंण इंटर कॉलेज में शिक्षकों की कमी और गैरसैंण क्षेत्र में विकास घोषणाओं पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर आवाज उठ रही है। इन आंदोलनों की खास बात यह है कि इनका नेतृत्व भाजपा के पूर्व पदाधिकारी और पार्टी से जुड़े लोग कर रहे हैं। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले स्थानीय मुद्दों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
BJP Faces Protests from Its Own Leaders in Karnaprayag
वर्ष 2002 से 2022 के बीच कर्णप्रयाग विधानसभा सीट पर हुए पांच चुनावों में चार बार भाजपा को जीत मिली। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के दिवंगत डॉ. एपी मैखुरी विधायक चुने गए थे। अब क्षेत्र में विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर हो रहे आंदोलनों ने राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है। स्थानीय स्तर पर उठ रहे ये मुद्दे भाजपा के लिए संगठनात्मक चुनौती भी बन सकते हैं।
सिमली बेस अस्पताल की मांग पर भाजपा के पूर्व पदाधिकारी मुखर
सिमली में बेस अस्पताल की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन का नेतृत्व भाजपा के पूर्व जिला पंचायत सदस्य और मंडल महामंत्री रह चुके देवेंद्र सिंह नेगी कर रहे हैं। देवेंद्र सिंह नेगी अस्पताल की मांग पूरी नहीं होने पर नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर भाजपा से इस्तीफा देने की बात भी कही है। क्षेत्र में बेस अस्पताल की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है और अब यह मुद्दा आंदोलन का रूप ले चुका है।
नैनीसैंण इंटर कॉलेज में शिक्षकों के लिए आंदोलन
नैनीसैंण इंटर कॉलेज में शिक्षकों की मांग को लेकर भाजपा के सोशल मीडिया विभाग से जुड़े पदाधिकारी राकेश नेगी भी आंदोलन कर रहे हैं। वह पहले भाजयुमो के ग्रामीण मंडल अध्यक्ष रह चुके हैं। राकेश नेगी 28 सितंबर से शिक्षकों की मांग को लेकर नंगे पांव चल रहे हैं। शिक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर पार्टी के अपने पदाधिकारी के आंदोलन में उतरने से मामला चर्चा में है।
गैरसैंण की घोषणाओं पर पूर्व विधायक ने उठाए सवाल
कर्णप्रयाग के पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी भी क्षेत्र में विकास कार्यों और पूर्व में की गई घोषणाओं पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर नाराजगी जता रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी परिक्षेत्र का विकास और झील निर्माण जैसी घोषणाओं पर अमल शामिल है। वहीं, कांग्रेस के चमोली जिलाध्यक्ष सुरेश डिमरी ने भी इन मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
समस्याओं के समाधान के लिए हो रही वार्ता
भाजपा चमोली के जिलाध्यक्ष गजपाल बल्र्वाल ने कहा कि जनसमस्याओं को उठाना अच्छी बात है। उनके अनुसार, विधायक और संगठन इन समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव और शिक्षा मंत्री से लगातार वार्ता कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही समस्याओं का निस्तारण होगा। साथ ही कहा कि पार्टी पदाधिकारियों को उचित मंच पर अपनी बात रखनी चाहिए और पूर्व विधायक से भी वार्ता की जाएगी।
बेस अस्पताल के शासनादेश को लेकर विधायक ने दिया आश्वासन
कर्णप्रयाग के विधायक अनिल नौटियाल ने सिमली बेस अस्पताल के मुद्दे पर कहा कि महिला बेस अस्पताल का नाम बदलकर बेस अस्पताल किया गया है। उनके मुताबिक, कुछ मानकों में शिथिलता देने की प्रक्रिया के कारण शासनादेश जारी होने में देरी हुई है। विधायक ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री और सचिव स्तर पर लगातार बातचीत की जा रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि जल्द शासनादेश जारी होगा। साथ ही कहा कि शिक्षकों, सड़कों और अन्य स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
चुनाव से पहले स्थानीय मुद्दे बन सकते हैं अहम
कर्णप्रयाग विधानसभा में बेस अस्पताल, शिक्षा और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दे लगातार उठ रहे हैं। इन आंदोलनों में भाजपा से जुड़े लोगों की भागीदारी ने राजनीतिक चर्चा को नया आयाम दिया है। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार और संगठन इन मांगों पर कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं और स्थानीय समस्याओं का समाधान किस तरह निकलता है।