Video: रो पड़ा उत्तराखंड...5 साल के बेटे ने पिता को दी आखिरी विदाई, चले गए पप्पू कार्की (Tribute to pappu karki )
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Image: Tribute to pappu karki

Video: रो पड़ा उत्तराखंड...5 साल के बेटे ने पिता को दी आखिरी विदाई, चले गए पप्पू कार्की

Video: रो पड़ा उत्तराखंड...5 साल के बेटे ने पिता को दी आखिरी विदाई, चले गए पप्पू कार्की

ये तस्वीर देखकर ही आप अंदाजा लगा सकते हैं कि पप्पू कार्की के बेटे दक्ष के लिए पिता कौन थे। उत्तराखंड ने एक महानायक खो दिया और उनकी आखिरी विदाई में लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। उनके गृहक्षेत्र प्रेमनगर (पांखू) के लोग स्तब्ध हैं। मां ने जब अपने कलेजे के टुकड़े की मौत की खबर सुनी तो बेसुध हो गईं। पप्पू कार्की का प्यारा सा बेटे दक्ष को अपने पिता पर हमेशा से गर्व रहा। घर में कोई भी आता तो दक्ष सीना फुलाकर कहता था, जानते हो मेरे पिता कौन हैं ? 5 साल के दक्ष के मासूम मन में इस वक्त ना जाने क्या सवाल उमड़ रहे होंगे। पप्पू कार्की मूल रूप से पिथौरागढ़ के बेड़ीनाग के रहने वाले थे। प्राथमिक विद्यालय हीपा से उन्होंने शुरुआती शिक्षा ग्रहण की थी। इसके बाद उन्होंने जूनियर हाईस्कूल की पढ़ाई जूनियर हाईस्कूल प्रेमनगर से पूरी की।

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पप्पू कार्की के गायन की प्रतिभा को पप्पू के चाचा कृष्ण सिंह कार्की बचपन में ही जान चुके थे। पांच साल की उम्र से ही कान में हाथ लगा कर न्योली गाने वाले पप्पू कार्की स्कूल में राष्ट्रीय पर्वों में हमेशा गाते थे। परिवार की हालत खराब थी। इस वजह से पप्पू कार्की हाईस्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ कर दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करने लगे थे। बचपन से ही लोक संगीत में रुचि रखते थी तो कुमाऊंनी गीतों के एलबम बनाने लगे। 2003 में अपने पहले एलबम ‘मेघा’ पप्पू कार्की उत्तराखंड में छाने लगे थे। बेड़ीनाग तहसील की सैनर ग्राम पंचायत के शेलावन तोक में 1984 में पप्पू कार्की का जन्म हुआ था। उनके पिता कृष्ण कार्की का डेढ़ साल पहले निधन हो चुका था। पप्पू कार्की अपने परिवार के इकलौते चिराग थे। फिलहाल वो अपनी पत्नी कविता और पांच साल के बेटे दक्ष के साथ हल्द्वानी में किराए के मकान में रह रहे थे।

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पप्पू को नए अंदाज में काम करना काफी पसंद था। वो अपनी टीम के साथ नया प्रयोग करते थे। हाल ही में नेपाली मूल की गायिका मान्डबी त्रिपाठी के साथ पप्पू ने छम छम बाजली हो गाया था। इस गीत में पहाडी गाने को नेपाली संगीत में पिरोया था। इस गीत की हर जगह काफी तारीफ हुई है। साल 2006 में दिल्ली में आयोजित उत्तराखंड आइडल में पप्पू कार्की ने प्रतिभाग किया था और दूसरे स्थान पर रहे थे। 2009 में उन्हें मसूरी में आयोजित एक अवार्ड समारोह में उन्हें सर्वश्रेष्ठ नवोदित कलाकार का खिताब दिया गया। इसके बाद यूका अवॉर्ड में 2014 के दौरान उन्हें बेस्ट सिंगर के खिताब से सम्मानित किया गया था। साल 2015 में मुंबई में हुए एक कार्यक्रम में पप्पू कार्की को गोपाल बाबू गोस्वामी अवार्ड भी मिल चुका था।

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