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Image: Story of dhan singh ghariya teacher from uttarakhand

उत्तराखंड के असली हीरो तो ऐसे शिक्षक हैं..उत्तरा पंत बहुगुणा भी इनसे कुछ सीखें !

उत्तराखंड के असली हीरो तो ऐसे शिक्षक हैं..उत्तरा पंत बहुगुणा भी इनसे कुछ सीखें !

उत्तराखंड में एक महिला शिक्षक अपने कार्यक्षेत्र में बीते तीन साल से पढ़ा ही नहीं रही हैं। उत्तरा पंत बहुगुणा की मांग है कि उन्हें उत्तरकाशी से देहरादून शिफ्ट कर दिया जाए। लेकिन उन हजारों शिक्षकों का क्या, जिनका नंबर उत्तरा पंत बहुगुणा से पहले आता है ? उन शिक्षकों के बारे में सोचा किसी ने जो पहाड़ में लगातार सेवा करते आ रहे हैं। आज एक ऐसे शिक्षक के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं, जो ना जाने कितने वर्षों से दुर्गम में ही तैनात हैं। इनका नाम है धान सिंह घरिया। ये जीआईसी गोदली रुद्र्प्रयाग में पढ़ाते हैं। आपको बता दें कि जीआईसी गोदली रुद्रप्रयाग अति दुर्गम क्षेत्र में आता है। वहां बीते 15 साल से भी ज्यादा वर्षो से धान सिंह गारिया एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। धान सिंह गारिया ना सिर्फ पूरी निष्ठा से छात्रों को पढ़ाते हैं बल्कि साथ मे वो पूरे क्षेत्र में पेड़ों वाले गुरुजी के नाम से भी जाने जाते हैं।

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दरअसल धान सिंह घरिया को पेड़ों से बेहद लगाव है। अब तक धान सिंह घारिया अपने स्कूल और आस-पास के क्षेत्रों में हज़ारों पेड़ लगा चुके हैं और आज भी लगा रहे हैं। धान सिंह घारिया की पत्नी और 2 छोटे छोटे बच्चे देहरादून में रहते हैं। जब धान सिंह घारिया से सवाल किया गया कि ‘आपके बच्चे अभी छोटे हैं और पत्नी देहरादून में अकेली हैं। आपका रिकॉर्ड भी अच्छा है तो देहरादून में तबादला क्यों नही लिया ? जानते हैं धान सिंह घरिया ने क्या कहा ? उनका कहना है कि बहुत बार मौका मिला ट्रांसफर का पर नहीं गया। क्योंकि मुझे बस पहाड़ की सेवा ही करनी है। यही मेरा स्वर्ग है और यही मेरा घर है। धन्य हैं ऐसे शिक्षक जो पहाड़ को अपना स्वर्ग और घर मानते हैं और वहां अपनी सेवा को परम धर्म। वरना ऐसे शिक्षक भी हैं, जो पहाड़ में सेवा देने को 'वनवास' कहते हैं।

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हमारा मकसद जनभावनाएं आहत करना नहीं है। हमारा मकसद ये है कि आप ये समझ सकें कि पहाड़ों में अगर कोई शिक्षक पढ़ाएगा नहीं तो पहाड़ के बच्चों का क्या होगा ? देहरादून आने की अपनी जिद को पूरा करने के लिए एक महिला शिक्षक महीनों से विद्यालय में अनुपस्थित है। क्या अब पहाड़ में बच्चों का भविष्य बर्बाद नहीं हुआ ? क्या ऐसे शिक्षक प्रदेश के बाकी शिक्षकों को भी देहरादून प्रेमी नहीं बना रहे ? मुख्यमंत्री का व्यवहार गलत था बिल्कुल सही बात है। लेकिन अपनी जिद पूरी करने के लिए विद्यालय में अनुपस्थित रहना और पहाड़ी बच्चों का भविष्य खराब करना उससे भी ज्यादा गलत है। धान सिंह गारिया जैसे शिक्षक उत्तराखंड के हीरो हैं। ऐसे शिक्षक उत्तराखण्ड की शिक्षा के भविष्य को संवार रहे हैं। आप भी सोचिए कि आखिर कैसे शिक्षक को हीरो बनाना है ?

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