उत्तराखंड का सपूत, जो शादी के दो महीने बाद शहीद हुआ था.. रो पड़ी थी देवभूमि (Tehri martyr prakash chand story )
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Image: Tehri martyr prakash chand story

उत्तराखंड का सपूत, जो शादी के दो महीने बाद शहीद हुआ था.. रो पड़ी थी देवभूमि

उत्तराखंड का सपूत, जो शादी के दो महीने बाद शहीद हुआ था.. रो पड़ी थी देवभूमि

हमारा इन कहानियों को आप तक पहुंचाने का मकसद सिर्फ इतना ही है कि आप उन वीरों को भूलें नहीं। साल 2016...24 दिसंबर को एक खबर सामने आई थी। उत्तराखंड के एक लाल ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में आतंकियों से लोहा लेते हुए 21वीं राष्ट्रीय राइफल में तैनात टिहरी के प्रकाश चंद्र शहीद हो गए थे। टिहरी के जाखणीधार ब्लॉक के स्वाड़ी कांडी गांव के रहने वाले सैनिक प्रकाश चंद कुमांई डेपुटेशन पर 21वीं राष्ट्रीय राइफल में तैनात थे। श्रीनगर में आतंकियों के खिलाफ आपरेशन के दौरान वो शहीद हो गए। साल 2012 को प्रकाश चंद सेना में भर्ती हुए थे। दिसंबर में प्रकाश शहीद हुए थे उससे ठीक दो महीने अक्टूबर में उनकी शादी हुई थी। पत्नी के हाथों की मेंहदी अभी सूखी भी नहीं थी और एक वीर मातृभूमि के लिए कुर्बान हो गया था।

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प्रकाश तीन भाइयों में दूसरे नंबर के थे। शहीद का बड़ा भाई पुलिस में तैनात है। एक महीने पहले ही ड्यूटी पर गए बेटे का शव देखकर मां-पिता और भाई-बहिनों के साथ ही शहीद की पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। लोग किसी तरह उन्हें हौसला बंधाते रहे। शादी के सवा दो महीने में ही मांग का सिंदूर मिटने पर उनकी पत्नी कल्पना बेहोशी की हालत में पहुंच गई थी। माहौल में एक अजब सी मायूसी थी। जवान बेटे की शहादत पर जहां हर किसी की आंखों में आंसू थे वहीं इस शहादत पर हर दिल को गर्व था। साल 2012 में प्रकाश 6 मैकेनाइज्ड इनफेंट्री में भर्ती हुए थे। उन्हें 12 आरआर रेजीमेंट में दो साल की तैनाती दी गई थी। वो उन दिनों जम्मू में स्थित रामवन के किलागजपत में तैनात थे। अपनी बटालियन में वो एक जांबाज के रूप में जाने जाते थे।

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साल 2016 शनिवार 24 दिसंबर को सुबह साढ़े दस बजे के करीब वो पेट्रोलिंग पर निकले थे और फिर वापस नहीं लौटे। शहीद हुए प्रकाश चंद कुमाईं का पार्थिव शरीर जब उनके गांव पहुंचा था तो पूरा गांव गमगीन हो गया। वीर सैनिक के अंतिम दर्शन के लिए उनके घर पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। देवल स्थित पैत्रिक घाट पर सेना के जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी थी। हमारा मकसद सिर्फ इतना है कि आपकी यादों में ऐसे वीर जवान जिंदा रहें। याद रखिए अगर आप आज चैन की सांस ले पा रहे हैं, तो इन्हीं शहीदों के बूते ले पा रहे हैं, जिन्हें अपने प्रोणों की फिक्र नहीं होती और वो मातृभूमि की रक्षा के लिए पल पल तैनात रहते हैं। इस वीरता को राज्य समीक्षा का सलाम।

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