पौड़ी जिले के नौली गांव की ‘गोल्डन गर्ल’..पाकिस्तान, थाईलैंड को धूल चटा चुकी है ये बेटी (Story of gold medalist ritu negi )
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पौड़ी जिले के नौली गांव की ‘गोल्डन गर्ल’..पाकिस्तान, थाईलैंड को धूल चटा चुकी है ये बेटी

पौड़ी जिले के नौली गांव की ‘गोल्डन गर्ल’..पाकिस्तान, थाईलैंड को धूल चटा चुकी है ये बेटी

बेटियां हैं, तो उत्तराखंड है। वो बेटियां ही हैं, जो उत्तराखंड के लिए एक मजबूत स्तंभ बनकर खड़ी हुई हैं। हर क्षेत्र में सफलता के झंडे गाढ़कर इन बेटियों ने हर बार देवभूमि का नाम रोशन किया है। ऐसी ही एक बेटी है ऋतु नेगी। पौड़ी के कल्जीखाल ब्लॉक के कफोलस्यूं नौली गांव की इस बेटी की सफलता पर आज पूरा उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरा देश गर्व करता है। ये वो बेटी है जो पाकिस्तान, थाइलैंड और नेपाल जैसे मुल्कों के खिलाड़ियों को धूल चटा चुकी है। इस बेटी की उपलब्धियों की कहानी बेमिसाल है। अब तक 5 गोल्ड मेडल और 2 सिल्वर मेडल अपने नाम कर चुकी ऋतु नेगी ताइक्वॉन्डो की जबरदस्त प्लेयर हैं। कहते हैं हौसले हों, तो उम्मीदों को पंख लग जाते हैं। ऋतु नेगी ने भी अपनी एक राह चुनी। जानते हैं ऋतु नेगी की सबसे बड़ी सफलता क्या है ?

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साल 2017 में बैंकाक में ताईक्वांडो इंटरनेशनल चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था। ऋतु नेगी भारत का प्रतिनिधित्व कर रहीं थीं। इस प्रतियोगिता में ऋतु ने पाकिस्तान, नेपाल और थाईलैंड के खिलाड़ियों को मात देकर देश के लिए गोल्ड मेडल जीता था। ये वो पल था जब देश को अहसास हुआ कि पहाड़ की बेटियां साहसिक खेलों की भी उस्ताद हैं। ऋतु नेगी इस वक्त खुद को बड़े कॉम्पिटीशन के लिए तैयार कर रही हैं। इसके अलावा ऋतु नेगी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी लेवल पर 1 गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। स्टेट लेवल पर एक मेडल और नेशनल लेवल पर तीन गोल्ड मेडल ऋतु नेगी ने जीते हैं। ऋतु के पिता का नाम है कुलदीप सिंह नेगी, जो अपनी बेटी की हर जरूरत पर खड़े हो जाते हैं। कुलदीप सिंह नेगी और कुसुम नेगी के घर में 2 सितंबर 1996 को ऋतु का जन्म हुआ था।

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बचपन से ही इस बेटी के दिल में ताइक्वान्डो को लेकर जबरदस्त जुनून था। पिता ने जब ये सब कुछ देखा तो अपनी बेटी का भरपूर साथ दिया। इस जुनून को उन्होंने पांच अगस्त 2017 की शाम को साबित कर दिया था। 53 किलो भार वर्ग में ऋतु नेगी ने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता था। हालांकि ऋतु अपने परिवार के साथ दिल्ली रहती हैं लेकिन जब भी उन्हें मौका मिलता, वो कफोलस्यू नौली गांव में अपनी दादी से मिलने जाती। दादी रुंदे गले से कहती हैं कि भले ही जब वो मेरे पास आती है। मैं उसे जी भरकर दुलारती हूं। ऋतु नेगी जैसी बेटियों की वजह से उत्तराखंड का नाम देश और दुनिया में रोशन हो रहा है। इन बेटियों ने साबित किया है कि किसी भी मामले में वो लड़कों से कम नहीं। जीतना उनका जुनून है और इस जुनून को राज्य समीक्षा की टीम सलाम करती है।

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