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Image: DU to make hill station in uttarakhand 22 village

वाह! उत्तराखंड के 22 गांवों को हिल-स्टेशन बनाएगा डीयू, केंद्र सरकार से मिली हरी झंडी!

वाह! उत्तराखंड के 22 गांवों को हिल-स्टेशन बनाएगा डीयू, केंद्र सरकार से मिली हरी झंडी!

लिटरेटर फेस्टिवल और फिल्म फेस्टिवल जैसे बड़े आयोजन अब आपको उत्तराखंड के गांवों में होते दिखेंगे। जी हां कुछ ही वक्त बाद उत्तराखण्ड के एक गांव में साहित्य महोत्सव और फिल्म महोत्सव जैसे कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके लिए पूरा प्रारूप दिल्ली में तैयार हो रहा है। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के 22 गांवों को मिनी हिल स्टेशन के रूप में विकसित करने का बीड़ा दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के श्री वेंकटेश्वर कॉलेज के प्रोफेसरों ने उठाया है। इसमें डीयू के छात्र भी अपना योगदान देंगे। इन गांवों को कुछ इस तरह से विकसित किया जाएगा कि भविष्य में यहां साहित्य महोत्सव व फिल्म महोत्सव जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकें। प्रोफेसरों द्वारा इन 22 गांवों में मार्च 2017 से मार्च 2018 तक सर्वे किया गया था।

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1 साल के भीतर अल्मोड़ा के एक गांव को पायलट प्रोजक्ट के तहत मिनी हिल स्टेशन में तब्दील किया जाएगा और वहां रोजगार के अवसर भी पैदा किए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत भारत के पूर्व गृह मंत्री और स्वतंत्रता सेनानी गोविंद बल्लभ पंत के पैतृक गाव खूंट से हो रही है। करीब 10 लाख रुपये की लागत से एक साल में ये गांव मिनी हिल स्टेशन के तौर पर विकसित किया जाएगा। इसके बाद अल्मोड़ा के अन्य 21 गावों को भी विकसित किया जाएगा। गाव में दीर्घकालिक पर्यटन की दिशा में प्रोजेक्ट को लागू किया जाएगा। गाव के घरों में वर्षा जल संरक्षण का मॉडल भी विकसित किया जाएगा। साथ ही घरों के कमरों की मरम्मत कराई जाएगी। बाथरूम बनाए जाएंगे, जिससे यहां पर लोग ठहर सकें। पर्यटकों के आने से स्थानीय लोग प्रतिदिन दो हजार रुपये तक की आमदनी कर सकेंगे।

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बताया जा रहा है कि ये प्रोजेक्ट पूरी तरह से पर्यावरण हितैषी होगा। श्री वेंकटेश्वर कॉलेज के इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. निर्मल कुमार के साथ कई अन्य प्रोफेसरों भी इस सर्वे में शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि पहाड़ी गांवों में रहने वाले लोग रोजगार की तलाश में मैदानी भागों की तरफ पलायन कर रहे हैं। इससे न सिर्फ इन गांवों की सांस्कृतिक विरासत खत्म हो रही है बल्कि गांव के गांव विलुप्त हो रहे हैं। सर्वे रिपोर्ट को अप्रैल 2018 में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के सामने पेश किया गया था। इसके बाद मंत्रालय के नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज में गावों को मिनी हिल स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए अर्जी दी गई। इन गांवों को विकसित करने के लिए 50 लाख रुपये मंजूर किए जा चुके हैं। जिससे अब उत्तराखंड के इन गावों का भविष्य सुधारा जाएगा।

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