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Image: high court order for stay in bugyal

सवाल रोज़गार का..पहाड़ में खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं युवा?

सवाल रोज़गार का..पहाड़ में खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं युवा?

अगर आप भी उत्तराखंड जाकर ट्रैकिंग का मन बना रहे है तो ये खबर आपको हैरान कर सकती है। दरअसल उत्तराखंड में हाईकोर्ट ने रिवर राफ्टिंग पर तो रोक लगा ही दी लेकिन इसके साथ साथ बुग्यालों में कैंपिंग पर भी रोक लगा दी है। ऐसे में वो लोग परेशान हैं, जो कैंपिंग, राफ्टिंग और ट्रैकिंग को अपने रोजगार का जरिया बना चुके थे। हाल ही में कोलकाता से 12 सदस्यीय पर्वतारोही दल उत्तरकाशी पहुंचा और उसने वहां की लोगों द्वारा चल रही एक ट्रैकिंग कंपनी के मार्फत जोगिन-3 पर आरोहण की तैयारी की। लेकिन जब ट्रैकिंग की बारी आई तो वन विभाग ने पर्वतारोहण और उच्च हिमालयी ट्रैकिंग पर हाईकोर्ट नैनीताल के आदेशों का हवाला देते हुए रोक लगा दी है। जिसके बाद इन लोगों को मजबूरन वापस लौटना पड़ा। एजेंसी के संचालक बिहारी लाल के मुताबिक 18 अगस्त को सारी औपचारिकताएं पूरी करते हुए फीस भी जमा कर दी गई थी।

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जब ट्रैकिंग का वक्त आया तो पहले पर्वतारोही दल ने तीन दिनों से उत्तरकाशी में डेरा डाले रखा। लेकिन तीन दिन के इंतजार के बाद जब वन विभाग ने इंकार किया तो अब पर्वतारोही खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। वही वन विभाग के रुख को देखते हुए ट्रैकिंग कारोबार को बड़ा झटका लगा है। पर्वतारोहियों के नहीं आने से जिले में पर्वतारोहण और उच्च हिमालयी ट्रैकिंग कारोबार पूरी तरह चौपट हो जाएगा। जिसकी वजह से इस व्यवसाय से जुड़े हजारों युवाओं की आजीविका छिननी तय है। उत्तरकाशी माउंटेनियरिंग एवं ट्रैकिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र राणा और पर्वतारोहण एवं ट्रैकिंग व्यवसाय से जुड़े पीतांबर पंवार, बिहारी लाल, भागवत सेमवाल आदि का कहना है कि पर्वतारोहण और ट्रैकिंग उत्तराखंड के पर्यटन का बड़ा हिस्सा है।

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इस कारोबार के कई परिवार निर्भर है। इन लोगों का कहना है कि गंगोत्री हिमालय क्षेत्र में सिर्फ ग्लेशियर और मोरेन हैं। ऐसे में वन विभाग द्वारा हाईकोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या कर इस कारोबार पर रोक लगाना गलत है। इन लोगों के मुताबिक सरकार को जल्द हाईकोर्ट के उक्त फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए। प्रमुख वन संरंक्षक जयराज के मुताबिक हाईकोर्ट ने बुग्याल क्षेत्रों में रात के समय किसी के रुकने पर पाबंदी लगाई है। पर्वतारोहण एवं उच्च हिमालयी ट्रैकिंग पर जाने के रास्ते बुग्याल क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में पुनर्विचार याचिका दायर होने तक फिलहाल पर्वतारोहण और उच्च हिमालयी ट्रैकिंग पर रोक लगाई गई है। हालांकि ये बात भी सच है कि ट्रैकिंग के नाम पर उत्तराखंड के बुग्यालों का अंधाधुध इस्तेमाल हो रहा है। इससे बुग्यालों की खूबसरती पर दाग लग रहा है।

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