हादसों का उत्तराखंड..देवभूमि में हर महीने 36 सड़क हादसे, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा (accident report in uttarakhand )
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Image: accident report in uttarakhand

हादसों का उत्तराखंड..देवभूमि में हर महीने 36 सड़क हादसे, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

हादसों का उत्तराखंड..देवभूमि में हर महीने 36 सड़क हादसे, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

उत्तराखंड में हुआ धूमाकोट सड़क हादसा तो याद होगा आपको जिसने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया था। 48 लोगों की मौत ने जिम्मेदार महकमों को कटघरे में खड़ा कर दिया था। कुछ दिन पहले गंगोत्री हाईवे और अल्मोड़ा में हुए हादसे भी साबित कर रहे हैं कि पहाड़ में सफर बिल्कुल भी आसान नहीं। इसके बावजूद हादसों की रोकथाम के लिए सरकारी मशीनरी गंभीर नहीं दिखती। प्रदेश में ना तो सड़क हादसे रुक रहे है और ना ही खस्ताहाल सड़क की किस्मत बदल रही है। बस किस्मत बदल रही है उन परिवारों की जो इन हादसों में अपनों को खो रहे है। आपको जानकर हैरानी होगी कि उत्तराखंड में हर महिने 36 सड़क हादसे होते है। मतलब की हर दिन कही कही एक सड़क हादसा तो जरुर होता है। फिर चाहे वो ओवरस्पीड, ओवरलोड या फिर बदहाल सड़कों की वजह से होते है। राज्य को बने 17 साल हुए है और अब तक 7477 हादसे हो चुके हैं।

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जिसमें 843 बस दुर्घटना शामिल हैं। आंकड़ों की माने तो हर माह चार बस एक्सीडेंट होते हैं। इन हादसों में 2497 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि पांच हजार लोग घायल हुए है। जरा सोचिए अगर सड़कों के निर्माण के साथ साथ नियम कानून का सही तरीके से पालन किया जाता तो कितने हादसे रोके जा सकते थे। इसे सरकारी महकमों की आधी-अधूरी तैयारी ही कहा जाएगा कि वो इस मामले में अभी भी गंभीरता नहीं दिखा रही है। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा हादसें कार चालकों के साथ हुए है। 17 साल में अब तक 2129 कार एक्सीडेंट हो चुके है। जबकि 1548 बाइक, 1139 ट्रक, 969 टैक्सी, 849 जीप वाहनों से दुर्घटना हुई है। जनवरी से मई के बीच नैनीताल-हल्द्वानी जनपद में 45 लोग अलग-अलग सड़क हादसों में जान गवां चुके हैं।

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ये आंकड़ा देहरादून के बराबर है। ऊधम सिंह नगर में 92 और हरिद्वार में 76 मौत हुई है। सड़क हादसों में मौतों को लेकर नैनीताल प्रदेश में तीसरे नंबर पर है। बात करे प्रदेश में हुए बड़े हादसों की तो 14 मार्च को अल्मोड़ा से रामनगर जा रही बस टोटाम के पास खाई में गिर गई जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी। दो मई को थल-मुनस्यारी मार्ग पर बस खाई में गिरने से दो आइटीबीपी के जवानों की मौत हो गई थी। इसके बाद एक जुलाई को धूमाकोट हादसे में 48 लोगों ने अपनी जान गवांई। इसी महिने 19 जुलाई को ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर बस गिरने से 14 की मौत हो गई। अगर परिवहन विभाग अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझे और ओवर लोडिंग, अनफिट वाहनों के चलने पर रोक लगाने के साथ ही बिना हैवी ड्राइविंग लाइसेंस के चालकों को वाहन न चलाने दे तो निश्चित तैार से उत्तराखंड में सडक हादसों पर लगाम लगाई जा सकती है।

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