देवभूमि में भीषण हादसा, खाई में गिरी कार..एक ही परिवार से उठी दो भाइयों की अर्थी (Road accident in tehri two brothers died)
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Image: Road accident in tehri two brothers died

देवभूमि में भीषण हादसा, खाई में गिरी कार..एक ही परिवार से उठी दो भाइयों की अर्थी

उत्तराखंड में एक बार फिर से भीषण हादसा हुआ है। हादसे में एक ही परिवार के दो भाइयों की दर्दनाक मौत हुई है।

उत्तराखंड में हादसे लगातार बढ़ते जा रहे हैं और सड़क पर कोहराम मच रहा है। हम बार बार आपसे अपील करते हैं कि सड़क पर जब भी चलें तो सुरक्षा का ध्यान रखें। वरना कभी भी किसी बड़े हादसे से मातम मच सकता है। इस बीच एक और हादसा हुआ है। एक पिता अपने दो बेटों के साथ कार से निकले थे और इस दौरान एक भीषण हादसा हो गया। हादसे में एक बेटे की मौके पर मौत हो गई। दूसरे बेेटे की इलाज के दौरान मौत हो गई और पिता गंभीर रूप से घायल हैं। पिता ने शायद कभी सोचा भी नहीं था कि वो अपने बच्चों के साथ घर से निकलेंगे तो बच्चे घर वापस नहीं लौटेंगे। हादसे की पूरी कहानी विस्तार से जानिए।
दरअसल मंगलवार को उत्तरकाशी से देहरादून की तरफ एक कार जा रही थी। कार में एक ही परिवार के पिता और दो बेटे सफर कर रहे थे।

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कार नंबर UK 07U 8042 शाम के वक्त करीब 6 बजे अलमास गांव के पास अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। उत्तरकाशी के यश (13) की मौके पर मौत हो गई। यश का भाई सत्यम और पिता नीलकमल गंभीर रूप से घायल हो गए। यश के भाई सत्यम ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। ये परिवार उत्तरकाशी का रहने वाला है। 13 साल का यश हिम क्रिश्चियन एकेडमी उत्तरकाशी में छठी कक्षा में पढ़ता था। उसका भाई सत्यम स्कॉलर होम देहरादून में 12वीं में पढ़ रहा है। हादसे के बाद यश का शव उत्तरकाशी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रखा गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी की। बताया जा रहा है कि पिता नीलकमल अपने बड़े बेटे सत्यम को देहरादून छोड़ने आ रहे थे। छोटे बेटे यश की स्कूल की छुट्टी थी तो पिता ने सोचा कि उसे भी देहरादून घुमा लिया जाए।

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शाम तक पिता और बेटे को वापस उत्तरकाशी पहुंचना था लेकिन रास्ते में भीषण हादसा हो गया। बताया जा रहा है कि नीलकमल के दोनों बेटों से बड़ी एक बेटी भी है। डुंडा में उनकी कपड़े की दुकान है।
सवाल फिर से वही है कि आखिर कब तक देवभूमि में इस तरह के हादसे होते रहेंगे और कब तक ऐसा कोहराम मचता रहेगा ? एक आकंड़ा कहता है कि उत्तराखंड में हर दिन एक भीषण हादसा हो रहा है और कोई ना कोई मौत के मुंह में समा रहा है। एक साल के भीतर 700 से ज्यादा लोगों की मौत इस बात का उदाहरण भी है। एक बार फिर से एक हादसा हुआ और एक परिवार को जिंदगी भर का जख्म दे गया।

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