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Image: general bipin rawat told what is the planning after retirement

रिटायरमेंट के बाद पहाड़ में ही रहेंगे जनरल बिपिन रावत, बताई अपने दिल की बात..देखिए वीडियो

जनरल बिपिन रावत इस वक्त सीडीएस के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। इस पद से रिटायरमेंट के बाद जनरल बिपिन रावत अपने गांव, अपने प्रदेश के लिए काफी कुछ करना चाहते हैं, इसके लिए उनके पास खास योजनाएं हैं...

पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस के तौर पर अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह निभा रहे हैं। पहाड़ के इस लाल का पूरा जीवन देश के लिए समर्पित रहा। उनके सेनाध्यक्ष पद पर रहने के दौरान ही ये तय हो गया था कि उन्हें इस पद के बाद कौन सी जिम्मेदारी दी जाएगी। अभी वो सीडीएस के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। इस पद से रिटायरमेंट के बाद जनरल बिपिन रावत अपने गांव, अपने प्रदेश के लिए काफी कुछ करना चाहते हैं। इसके लिए उनके पास खास योजनाएं हैं। बीते सितंबर में वो उत्तरकाशी के थाती गांव पहुंचे थे, जहां जनरल बिपिन रावत का ननिहाल है। इस दौरान उन्होंने अपने रिटायरमेंट प्लान पर भी बात की। उन्होंने कहा कि वो रिटायरमेंट के बाद उत्तराखंड स्थित अपने गांव में रहना चाहेंगे। दिल्ली में रिटायरिंग ऑफिसर सेमिनार के दौरान भी उन्होंने यही बात दोहराई कि वो रिटायरमेंट के बाद पहाड़ में रहना चाहते हैं, जहां वो बच्चों के लिए स्कूल खोलेंगे। अपने गांव में मरीजों के लिए अस्पताल भी बनवाएंगे, ताकि लोगों को इलाज के लिए भटकना ना पड़े। सेमिनार में जनरल रावत ने कहा था कि जब वो आर्मी चीफ बनने के बाद पहली बार अपने गांव गए तब वहां रोड तक नहीं थी। मेरे जाने के बाद कहीं जाकर वहां रोड बननी शुरू हुई। बता दें कि जनरल बिपिन रावत उत्तराखंड के पौड़ी जिले के रहने वाले हैं। उनका गांव सैण बमरौली ग्रामसभा में पड़ता है। पिछले साल जब वो अपने गांव गए तो उन्हें एक किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलना पड़ा था।

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जनरल रावत अब अपने गांव के हालात सुधारने के लिए काम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उनके गांव में रिटायर्ड फौजियों को ईसीएचएस (ECHS) के लिए करीब 80 किलोमीटर दूर कोटद्वार तक जाना पड़ता है, जबकि दिल्ली और बड़े शहरों में ये सुविधा सिर्फ 2-3 किलोमीटर की दूरी पर मिल जाती है। रिटायरमेंट के बाद वो फौजियों को बेसिक सुविधा मुहैया कराने के लिए काम करना चाहते हैं। गांव में बच्चों के लिए स्कूल और अस्पताल की जरूरत है, रिटायरमेंट के बाद वो इन बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम करेंगे। उनके पास रिटायरमेंट के लिए विशेष योजनाएं हैं। उत्तरकाशी दौरे के दौरान उन्होंने कहा था कि हमें पर्यावरण और प्रगति के बीच बैलेंस बनाना होगा। डैम बनने से पर्यावरण को नुकसान तो होता है, पर ये प्रगति के लिए जरूरी भी है। इससे बिजली मिलती है, लोगों को रोजगार मिलता है। इसी प्रगति और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। पहाड़ में इंजीनियरिंग-मेडिकल कॉलेज खुलने चाहिए, ताकि युवाओं को यहां से पलायन ना करना पड़े। उन्होंने कहा कि वो रिटायरमेंट के बाद अपने गांव और ननिहाल के लिए कुछ करेंगे। जनरल बिपिन रावत रिटायरमेंट के बाद क्या करने वाले हैं, ये आप इस वीडियो में उनसे खुद ही जान लीजिए...

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