उत्तराखंड में वीआईपी के लिए ठेंगे पर कानून? इन लोगों पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई ? (Satpal maharaj and om prakash case high court notice)
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Image: Satpal maharaj and om prakash case high court notice

उत्तराखंड में वीआईपी के लिए ठेंगे पर कानून? इन लोगों पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई ?

क्वारेंटीन नियमों की अनदेखी के लिए सतपाल महाराज की आलोचना हो रही है। विपक्ष उनके बहाने राज्य सरकार को घेर रहा है। सतपाल महाराज से पहले अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश भी मुख्यमंत्री की फजीहत करा चुके हैं...

कोरोना पॉजिटिव मिले कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चाओं में हैं। क्वारेंटीन नियमों की अनदेखी के लिए सतपाल महाराज की आलोचना हो रही है। विपक्ष उनके बहाने राज्य सरकार को घेर रहा है। कल हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस भी भेज दिया। महाराज के अलावा एक और अफसर हैं, जिन्होंने राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ाई हुई हैं। इनका नाम है ओमप्रकाश। ओमप्रकाश मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव हैं। इन दोनों की वजह से विपक्ष ने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। महाराज और ओमप्रकाश, दोनों पर नियमों की अनदेखी का आरोप है। चलिए पहले सतपाल महाराज की बात कर लेते हैं। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज का पूरा परिवार कोरोना पॉजिटिव मिला है, ये तो आप जानते ही हैं। सतपाल महाराज को होम क्वारेंटीन रहने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उन्होंने नियमों की लगातार अनदेखी की। बैठकों में हिस्सा लेते रहे। अब सतपाल महाराज का पूरा परिवार कोरोना पॉजिटिव मिला है। उत्तराखंड की पूरी कैबिनेट को भी उनकी वजह से क्वारेंटीन होना पड़ा।

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अब बात करते हैं IAS ओमप्रकाश की। आपको याद होगा कुछ दिन पहले यूपी के विधायक अमनमणि त्रिपाठी अपने 11 साथियों संग चमोली पहुंच गए थे। वो भी ऐसे वक्त में, जबकि लॉकडाउन के चलते वाहनों की आवाजाही बंद थी। अमनमणि कर्णप्रयाग से बैरंग लौटा दिए गए। चालान कटा और केस भी दर्ज हुआ। फिर सवाल उठा कि आखिर इन्हें चमोली जाने की परमिशन किसने दी। परमिशन देने वाले शख्स अपर मुख्य मुख्य सचिव ओमप्रकाश ही थे। इन दोनों मामलों में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने पूछा कि जब बदरीनाथ के कपाट नहीं खुले थे, किसी को भी वहां जाने की इजाजत नहीं थी तो अमनमणि त्रिपाठी और उनके साथियों को पास कैसे जारी कर दिया गया। अगर ऐसा करना कानूनन गलत था तो ओमप्रकाश के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। सतपाल महाराज के केस में भी इसी तरह के सवाल उठ रहे हैं। हाईकोर्ट ने पूछा कि जब क्वारेंटीन का उल्लंघन करने वाले आम लोगों के खिलाफ केस दर्ज हो रहा है, तो संवैधानिक पद पर बैठे जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। अब देखना ये है कि राज्य सरकार इस मामले में क्या जवाब देती है। बहरहाल दोनों ही मामलों को लेकर राज्य सरकार की खूब फजीहत हो रही है। विपक्ष ने तो विरोध-प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है। कांग्रेस कह रही है कि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने पूरे प्रदेश को संकट में डालने का काम किया है, उनके खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत केस दर्ज होना चाहिए।

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