उत्तराखंड पिथौरागढ़Forest officer accused of corruption

उत्तराखंड: भ्रष्टाचार के आरोपों पर अधिकारी को 15 दिन में देना होगा जवाब, वरना होगी बड़ी कार्रवाई

सम्बंधित अधिकारी को भ्रष्टाचार के प्रकरण पर 15 दिन के भीतर जवाब देने का नोटिस भेजा है। यदि वो 15 दिनों के भीतर नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विनय कुमार भार्गव: Forest officer accused of corruption
Image: Forest officer accused of corruption (Source: Social Media)

पिथौरागढ़: पिथौरागढ़ वन प्रभाग के अंतर्गत मुनस्यारी रेंज में बिना अनुमति टेंडर आवंटन और बिना अनुमोदन के वन क्षेत्र में स्थायी निर्माण और फायर लाइन के कार्यों को निर्धारित सीमा से अधिक करने के मामलों में शासन ने अधिकारी विनय कुमार भार्गव कारण बताओ नोटिस भेजा है। शासन ने विनय भार्गव को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया है, संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Forest officer accused of corruption

जानकारी के अनुसार, तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी और वर्तमान कंजरवेटर ऑफ फारेस्ट विनय कुमार भार्गव पर आरोप हैं कि उन्होंने 2019 में पिथौरागढ़ के वन विभाग में DFO के रूप में कार्य करते हुए कई स्थायी संरचनाओं का निर्माण बिना पूर्व स्वीकृति के करवाया। इसमें डोर मेट्री का निर्माण, वन कुटीर उत्पाद विक्रय केंद्र का निर्माण, 10 इको हट का निर्माण और ग्रोथ सेंटर का निर्माण शामिल हैं।

बिना टेंडर और सक्षम स्वीकृति के किए कई कार्य

भार्गव ने निर्माण सामग्री के लिए बिना टेंडर और सक्षम स्वीकृति के एक निजी संस्था का चयन किया गया। साथ ही, इस संस्था को एकमुश्त भुगतान भी किया गया। इतना ही नहीं, एक डेवलपमेंट कमिटी ने बिना सक्षम अनुमोदन के, मुनस्यारी के पर्यटन से प्राप्त धनराशि का 70% भाग देने के लिए अनुबंध भी किया। पिथौरागढ़ में 10 फायर लाइन के रखरखाव और सफाई के कार्य को वर्किंग प्लान में निर्धारित सीमा से अधिक किया गया। इसके अलावा 2020-21 में उन्होंने कुल 14.6 किलोमीटर लम्बाई की 10 फायर लाइन पर काम करने के बजाय 90 किलोमीटर फायर लाइन पर दो लाख रूपये खर्च किए।

जवाब देने का नोटिस जारी

आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने दिसंबर 2024 में इस मामले को गंभीर भ्रष्टाचार बताते हुए प्रमुख वन संरक्षक हॉफ को इस संदर्भ में पत्र लिखा था. इसके बाद उन्होंने जनवरी 2025 में इस मामले को दोबारा प्रमुख वन संरक्षक हॉफ के समक्ष प्रस्तुत किया। जिसके बाद प्रमुख वन संरक्षक हॉफ ने जनवरी 2025 में ही उत्तराखंड शासन में वन विभाग देख रहे प्रमुख सचिव विनय कुमार भार्गव को प्रकरण पर 15 दिन के भीतर जवाब देने का नोटिस भेजा है। यदि वो 15 दिनों के भीतर नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं तो उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।