उत्तराखंड चमोलीShame on you Uttarakhand health department

उत्तराखंड: शर्म करो स्वास्थ्य विभाग! एम्बुलेंस दी ना डॉक्टर.. डेढ़ साल के मासूम को मार डाला

गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक के डॉक्टर हायर सेंटर के नाम पर अपनी जिम्मेदारी से मुंह फेरते रहे, और एक डेढ़ साल के बीमार बच्चे की इलाज का इतंजार करते हुए मौत हो गई।

Uttarakhand health department: Shame on you Uttarakhand health department
Image: Shame on you Uttarakhand health department (Source: Social Media)

चमोली: जनपद चमोली के एक फौजी पिता ने सिस्टम पर आरोप लगाते हुए ये विडियो सोशल मिडिया पर पोस्ट किया है। जिसमें उन्होंने बताया है कि किस तरह स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण उन्होंने अपने डेढ़ साल के बेटे को खो दिया। गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक के डॉक्टरों ने हायर सेंटर के नाम पर अपनी जिम्मेदारी से मुंह फेर लिया, और उनका बेटा तड़पते हुए इस दुनिया से चला गया।

Shame on you Uttarakhand health department!

चमोली जिले के चिडंगा गांव के निवासी जम्मू-कश्मीर में तैनात सैनिक दिनेश चंद्र जोशी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है। उनका यह वीडियो सिर्फ एक पीड़ित पिता की शिकायत नहीं, बल्कि सिस्टम से सीधा सवाल है। उन्होंने कहा कि सरकार वादे तो करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि एक एंबुलेंस और इलाज तक समय पर नहीं मिल पाता है। उन्होंने बताया कि अगर उनके बच्चे को समय पर इलाज मिल जाता तो शायद आज उनका बेटा शुभांशु जोशी जिंदा होता। उन्होंने बताया है कि बीते 10 जुलाई की दोपहर बाद उनके डेढ़ साल के बेटे शुभांशु जोशी की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। सैनिक की मां और पत्नी बच्चे को लेकर ग्वालदम अस्पताल पहुंचीं लेकिन वहां इलाज नहीं मिल सका। वहां से बच्चे को कुमाऊं मंडल के बैजनाथ अस्पताल और फिर बागेश्वर के लिए रेफर किया गया।

घंटो एम्बुलेंस का इन्तजार करते रहे परिजन

शाम छह बजे के बाद बागेश्वर जिला अस्पताल में डॉक्टर ने भर्ती बच्चे की स्थिति गंभीर बताते हुए हल्द्वानी रेफर कर दिया। जब बागेश्वर में परिजनों ने 108 पर एंबुलेंस के लिए कॉल किया, लेकिन उनको कोई मदद नहीं मिल पाई. तड़पते बच्चे को गोद में लेकर परिजन एक घंटे तक इन्तजार करते रहे लेकिन एंबुलेंस का कोई पता नहीं था। जिसके बाद परेशान फौजी पिता ने खुद जिलाधिकारी को फोन कर मदद मांगी। जिसके बाद डीएम के आदेश पर रात साढ़े नौ बजे एक एंबुलेंस तो मिली, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बागेश्वर से हल्द्वानी ले जाते समय एंबुलेंस में ही शुभांशु की मौत हो गई। परिजनों ने लगभग चार घंटे में बच्चे को पांच अस्पतालों में घुमाया, लेकिन कहीं भी इलाज नहीं मिल सका। गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक के डॉक्टरों ने हायर सेंटर के नाम पर अपनी जिम्मेदारी से मुंह फेर लिया, और उनके बेटे की तड़पते हुए मौत हो गई।

एम्बुलेंस की बजाय मिला अभद्र व्यवहार

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फौजी दिनेश चंद्र ने बागेश्वर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि, जब उन्होंने इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक डॉ. भूपेंद्र घटियाल को फोन करके उनसे एंबुलेंस के देर से आने के कारण पूछा, तो उन्होंने कोई उत्तर न दे पाने की स्थिति बताई। दिनेश ने आरोप लगाया है कि एम्बुलेंस भेजने के बजाय उल्टा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। यह केवल एक पिता का दुख नहीं है, यह उस लापरवाह सिस्टम की काली तस्वीर है जो किसी की जान जाने के बाद ही हिलता-डुलता है। वहीं अधिकारियों ने इस मामले का संज्ञान लेने की बात कही है। बच्चे की मौत के बाद गहरी पीड़ा से गुजर रहे परिजनों का कहना है कि अब जांच करने से क्या होगा जब उनके बच्चे जिंदगी ही चली गई।

क्या होगी कार्रवाई ?

बागेश्वर सीएमओ डॉ. कुमार आदित्य तिवारी, ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच की जाएगी। इसके अलावा 108 सेवा के प्रभारी को नोटिस भेजकर सेवा को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। परिजनों ने अब तक इस मामले में कोई शिकायती दर्ज नहीं कराई है, शिकायत पत्र मिलने के बाद इस पूरे मामले की जांच की जाएगी। इस मामले में जो भी स्वास्थ्य कर्मी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।