हरिद्वार: उत्तराखंड पुलिस ने ऑपरेशन कालनेमि के तहत एक ऐसे अपराधी को गिरफ्तार किया है, जो एक दुष्कर्म आरोपी है और साधु के रूप में छुपा हुआ था। गिरफ्तार किए गए अपराधी पर नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने का आरोप में मुकदमा दर्ज है। इसके अलावा आरोपी शिव वेश धारण कर महिलाओं और छोटी बच्चियों को बहलाता-फुसलाता था, और फिर प्रसाद खिलाकर उनके साथ गलत काम करता था।
Operation Kalanemi: Criminal hiding in guise of Lord Shiva arrested
उत्तराखंड पुलिस ने जानकारी दी है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेश पर कांवड़ मेले से पहले ऑपरेशन कालनेमि की शुरुआत की गई थी। बीते गुरुवार को हरिद्वार पुलिस द्वारा ऑपरेशन कालनेमि के तहत चंडीघाट क्षेत्र में चेकिंग की जा रही थी। उसी दौरान पुलिस को भगवान शिव का वेश धारण किए एक व्यक्ति दिखा। जिसके बाद पुलिस ने उस व्यक्ति से पूछताछ की, जिसमें उसने बताया कि उसका नाम दीपक सैनी है और वो सुभाष नगर ज्वालापुर का निवासी है। आरोपी ने पुलिस को बताया कि वो लड़कियों और महिलाओं को शिव भगवान का प्रसाद देकर मनोकामना पूर्ण करने का झांसा देता है।
भगवान शिव के भेष में छुपा था दुष्कर्म आरोपी
पुलिस ने जब इस मामले की गहन जांच की तो पता चला कि आरोपी दीपक सैनी के खिलाफ हरिद्वार के श्यामपुर थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है। आरोपी दीपक सैनी पर एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर और झूठे प्रलोभन देकर उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप है। इस जांच के बाद पुलिस ने आरोपी दीपक सैनी को हिरासत में लेकर श्यामपुर थाने में पेश किया। आरोपी दीपक सैनी ने खुद को परम ज्ञानी और त्रिकालदर्शी शिवभक्त बताकर भोली-भाली महिलाओं और छोटी बच्चियों को बहलाता -फुसलाता था। जिसके बाद उन्हें प्रसाद खिलाकर उनके साथ गलत काम करता था।
पत्नी से घरेलू हिंसा का भी है आरोप
पुलिस ने बताया कि आरोपी दीपक सैनी पर नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के अलावा अपनी पत्नी के साथ मारपीट, गाली-गलौज और दहेज के लिए प्रताड़ित करने के आरोप भी हैं। आरोपी के खिलाफ उत्तरप्रदेश के सहारनपुर जिले के मंडी थाने में पत्नी के साथ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज किया गया है। हरिद्वार के एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल ने बताया कि पुलिस टीम अब आरोपी दीपक सैनी की शिकार बनी अन्य महिलाओं और बच्चियों की भी तलाश कर रही है, ताकि आरोपी को कड़ी से कड़ी मिल सके। हरिद्वार पुलिस द्वारा ऑपरेशन कालनेमि के तहत अब तक ढाई हजार से अधिक लोगों का सत्यापन किया जा चुका है।