देहरादून: उत्तराखंड में अतिक्रमण के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं, हाल ही धराली आपदा में जो होटल और दुकानें नष्ट हुए हैं। वे सभी भी आपदा संवेदनशील स्थान पर ही बनाए गए थे। ऐसे में राज्य सरकार ने नदी और बरसाती नालों के आस-पास और प्रदेश में हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए एक ऐप बनाने की योजना बनाई है।
Mobile App developed to stop encroachment in Uttarakhand
दरअसल, बीते मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में देहरादून सीएम आवास पर हाईलेवल बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में आपदा प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य था कि भविष्य में धराली जैसी आपदाओं से बचाव हो सके। बैठक के दौरान सीएम धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, हिमस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील स्थानों की तत्काल पहचान की जाए, ताकि संभावित खतरे से पहले ही सतर्कता बरती जा सके। उन्होंने कहा कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अतिक्रमण रोकने के लिए बनेगा विशेष ऐप
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश में नदी और बरसाती नालों के आस-पास और अन्य स्थानों पर अतिक्रमण को रोकने के लिए एक ऐप विकसित किया जाएगा। इस ऐप के जरिए उन सभी स्थानों की तस्वीरें और वीडियो अपलोड किए जा सकेंगे, जहां अवैध रूप से अतिक्रमण किया जा रहा है। सीएम धामी ने कहा कि इस ऐप के जरिए हम उन सभी अतिक्रमण कार्यों को समाप्त करेंगे जो ऐसी जगहों पर होते हैं जहां नदियां और बरसाती नाले हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ यह ऐप बहुत प्रभावी साबित होगा।
नदियों-नालों के किनारे निर्माण कार्य प्रतिबंधित
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्राकृतिक जल स्रोतों और नदियों और नालों के किनारों पर किसी भी प्रकार का सरकारी या निजी निर्माण कार्य प्रतिबंधित रहेगा। इसके लिए सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं तथा इनके क्रियान्वयन की नियमित निगरानी की जाए। प्रदेश में नदी और बरसाती नालों के पास अतिक्रमण की जिम्मेदारी पटवारी से लेकर तहसीलदार और एसडीएम तक सभी अधिकारियों की होगी। उनके कार्यकाल में अगर किसी भी नदी या बरसाती नाले के पास अतिक्रमण होता है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी अधिकारियों की होगी।