देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज बुधवार को सचिवालय में मंत्रिमंडल की अहम बैठक हुई। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की आचार संहिता के बीच हुई इस बैठक आज 26 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी है।
26 proposals approved in Dhami cabinet meeting
देहरादून सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज 13 अगस्त को सुबह कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के विकास से सम्बंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। कैबिनेट बैठक में आज अग्निवीरों को संविदा पदों पर भर्ती में आरक्षण और धर्मांतरण कानून को सख्त करने सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।
इन प्रस्तावों को कैबिनेट ने दी मंजूरी
- कैबिनेट ने धर्मांतरण कानून और सख्त करने के लिए कानून में कुछ संशोधनों के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। धर्मांतरण मामलों में दोषी को सजा देने का प्रावधान 10 साल से बढ़ाकर 14 साल कर दिया गया है।
- उत्तराखंड के मूल निवासी या स्थायी निवासी अग्निवीरों को सेवाकाल पूरा करने के बाद समूह ग के वर्दीधारी पदों की सीधी भर्ती में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण नियमावली – 2025 को मंजूरी मिली है। बताया जा रहा है कि अगले साल रिटायर होने के बाद 850 पदों पर भर्ती की जाएगी।
- उत्तराखंड परियोजना विकास एवं निर्माण निगम (UPDCC) का ढांचा पुनर्गठित किया गया है। जिसमें कुल 95 पदों का निर्माण किया गया है, जो सिंचाई विभाग से डेपुटेशन पर होंगे।
- सहकारिता विभाग की अधिसूचना 23 जुलाई 2001 के तहत नवगठित उत्तराखंड के सीमित संसाधनों के कारण उप्र सहकारी संस्थागत सेवामंडल नियमावली को विखंडित करते हुए सभी शक्तियां निबन्धक, सहकारी समितियों को उत्तराखण्ड में प्रदान की गई।
- राजकीय औद्योगिक संस्थानों में शेड/भूखंडों के आवंटन, निरस्तीकरण, स्थानांतरण और किराए आदि से संबंधित एकीकृत प्रक्रिया में संशोधन को स्वीकृति दी गई है।
- लखवाड़ जल विद्युत परियोजना के प्रभावित व्यक्तियों को नैनबाग के सर्किल रेट के अनुसार मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
- उत्तराखंड उच्चतर न्यायिक सेवा (संशोधन), नियमावली 2025 को स्वीकृति दी गई।
- उत्तराखंड भू सम्पदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) के वार्षिक प्रतिवेदन 2023-24 को विधानसभा में सदन पटल पर रखने की स्वीकृति मिल गई।
- उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड के वर्ष 2021-22 के वार्षिक वित्तीय प्रतिवेदन को विधानसभा पटल पर प्रस्तुत करने की स्वीकृति।
- विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 105 के तहत उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के वित्तीय वर्ष 2023-24 की वार्षिक रिपोर्ट को विधानमंडल के पटल पर रखने की स्वीकृति।
- विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 181 के तहत उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग द्वारा अधिसूचित किए गए विनियमों को अधिनियम की धारा – 182 के तहत विधानमंडल के पटल पर रखने की स्वीकृति।
- विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 104 (4) के तहत उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के वित्तीय वर्ष 2023-24 के वार्षिक लेखा विवरण को विधानमंडल के पटल पर रखने की स्वीकृति।
- कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 395 (बी) के अनुपालन में उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड के वित्तीय वर्ष 2023-24 के वार्षिक प्रतिवेदन को विधानसभा के पटल पर रखने की स्वीकृति दी गई।
- नगर निकायों में चुनाव के संदर्भ में अन्य पिछड़ा वर्ग के सर्वेक्षण कार्य हेतु पूर्व की भांति उत्तराखंड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बीएस वर्मा की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय समर्पित आयोग का गठन करने का निर्णय लिया गया।
- सिडकुल के 5 प्रतिशत कार्य उत्तराखंड के निवासियों को सौंपे जाएंगे, जिसका लाभ उत्तराखंड के मूल निवासी औद्योगिक संस्थानों के उम्मीदवारों को प्राप्त होगा।
- सूचना प्रौद्योगिकी, सूराज और विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत, विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (एसटीआई) नीति – 2025 को मंजूरी दी गई।
- ग्राम्य विकास विभाग के अंतर्गत प्रादेशिक विकास सेवा नियमावली 2011 में संशोधन को स्वीकृति दी गई।
- उत्तराखंड पंचायतीराज (संशोधन) विधेयक 2025 को विधानसभा के समक्ष पुनः प्रस्तुत करने की स्वीकृति दी गई।
- बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर के प्रशासन की व्यवस्था के लिए समिति में उपाध्यक्ष का एक अतिरिक्त पद सृजित किया गया।
- उत्तराखंड पशुपालन विभाग सांख्यिकीय सेवा नियमावली 2025 का प्रख्यापन किया गया।
- कैबिनेट में उत्तराखंड वित्त सेवा (संशोधन) नियमावली 2025 को मंजूरी दी गई।
- पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तार के साथ जीएसटी और रायल्टी को मंजूरी।
- उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति को स्वीकृति मिली है।
- वनीकरण निधि प्रबंधन और प्राधिकरण की वार्षिक रिपोर्ट को मंजूरी।
- सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की नियमावली को मंजूरी।
- संविदा आउटसोर्स कर्मचारियों के विभागों में उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति विभागीय प्रस्तावों के आधार पर जांच करेगी और मुख्यमंत्री को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी।