रुद्रप्रयाग: हर तरफ भारी बारिश के बाद मची तबाही, भूस्खलन में लापता लोग, मलबे के सैलाब में दबे बाजार, और एक अजीब सी मुर्दानी खामोशी.. ये मंजर देख कर कोई भी सहम सकता है। केदारघाटी की विधायक आशा नौटियाल, कल जब बड़ेथ और छेनागाड़ के आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में पहुंची तो उनकी आंखों से बरबस ही आंसू छलक उठे। विधायक की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जो अब चर्चा का विषय बन गयी है..
MLA Asha Nautiyal shed tears after witnessing devastation
एक इंसान होने के नाते अपने क्षेत्र में ऐसी तबाही देखकर कोई आम इंसान भी दुखी हो जाएगा। राजनीति एक तरफ है.. संवेदना एक तरफ। केदार घाटी की कई जगहों पर भूस्खलन के बाद भारी नुकसान हुआ है। अभी ज्यादा वक्त नहीं बीता जब एक साल तक बिना विधायक की रही केदारघाटी में कुंड, गुप्तकाशी, उखीमठ, मक्कू, फाटा आदि कई जगहों तक बड़ी मुश्किल से सड़कें तैयार हुई थी। हाल की आपदा ने कई जगह सड़कें तोड़ दी, सडकों पर फिर दरारें दिखने लगी हैं, पहाड़ों से मलवा बिखरा पड़ा है, कई लोग लापता हैं, जिला प्रशासन की टीमें मलबे में दबे पड़े लोगों की खोजबीन में जान जोखिम में डालकर प्रयासरत है। मार्ग बंद होने के कारण आपदा प्रबंधन टीमें बड़ी मुश्किल से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच पा रही हैं। मदद भेजना तक संभव नहीं हो पा रहा.. ऐसे में एक विधायक का अपने क्षेत्र में इस तबाही को देखने के बाद संवेदनाओं में बह जाना अपने क्षेत्र के लिए विधायक के मन की पीढ़ा को ही प्रदर्शित करता है।
आपदा में अवसर ढूंढ रहे "राजनीतिज्ञ"
हालांकि कई लोग आपदा की इस घड़ी में भी केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल की संवेदनशीलता पर राजनीतिक रोटियां सेकने में व्यस्त हैं। कई लोग आपदा को भी अवसर की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि कुछ ऐसे नेता भी हैं जो भले ही विरोधी पार्टियों से ताल्लुक रखते हैं, पर इस आपदा की घड़ी में अपने विधायक के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। ग्राउंड जीरो पर हो या सोशल मीडिया पर वह आपदा की घड़ी में केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के साथ खड़े दिखते हैं। लेकिन, ऐसे लोगों से जनता को भी सावधान रहना होगा जो इस आपदा की घड़ी में भी किसी की मृत्यु पर बहाए आंसुओं तक को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करने में जरा सा भी नहीं हिचकिचाते।