देहरादून: देहरादून से दिल्ली की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए उत्तराखंड रोडवेज ने एक बड़ी और राहतभरी घोषणा की है। उत्तराखंड रोडवेज ने देहरादून से दिल्ली जाने वाली बसों का रूट चेज किया है। इस नए रूट पर यात्रा का समय भी घटेगा और वॉल्वो बसों का किराया भी कम होगा।
Fare will be cheaper by Rs 203 in Dehradun-Delhi Volvo
उत्तराखंड रोडवेज लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। दिल्ली जैसे प्रमुख रूटों पर भी बसों को पर्याप्त सवारियां नहीं मिल रही हैं, जबकि प्राइवेट बस ऑपरेटरों की बसें फुल होकर जा रही हैं। ऐसी स्थिति में रोडवेज को यात्रियों को आकर्षित करने के लिए नए उपायों की सख्त जरूरत थी। उत्तराखंड रोडवेज ने एक ऐसी योजना शुरू की है जिससे अब देहरादून से दिल्ली जाने वाली नॉन-स्टॉप वॉल्वो बसों का किराया पहले की तुलना में कम होगा और यात्रा का समय भी घटेगा।
अब तक देना पड़ता था ₹954 किराया
वर्तमान में देहरादून के इंटर स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) से दिल्ली के लिए प्रतिदिन 24 नॉन-स्टॉप वॉल्वो बसें संचालित होती हैं। ये बसें देहरादून से रुड़की, मुजफ्फरनगर और मेरठ होते हुए दिल्ली पहुंचती हैं। इस रूट पर कुल यात्रा दूरी लगभग 250 किलोमीटर है और यात्रियों को इसके लिए ₹954 का किराया देना पड़ता है। इस रूट पर वॉल्वो बसों को देहरादून से दिल्ली पहुंचने में औसतन 4.5 घंटे लगते हैं।
नए रूट पर समय के साथ किराया भी घटेगा
लेकिन अब रोडवेज प्रशासन ने इन वॉल्वो बसों का रूट बदलने का निर्णय लिया है। नई योजना के तहत ये बसें अब सहारनपुर और शामली होते हुए दिल्ली जाएंगी। इससे यात्रा दूरी घटकर 235 किलोमीटर रह जाएगी और नया किराया मात्र ₹751 निर्धारित किया गया है। यानी यात्रियों को सीधे तौर पर ₹203 की बचत होगी। इस नए रूट यात्रा का समय थोड़ा घटकर लगभग 4.25 घंटे (सवा चार घंटे) हो जाएगा। रोडवेज ग्रामीण डिपो के एजीएम प्रतीक जैन के अनुसार, नए रूट की वजह से यात्री समय और पैसे दोनों की बचत कर पाएंगे।
यात्रियों और विभाग दोनों के लिए फायदेमंद
रोडवेज के महाप्रबंधक (संचालन) पवन मेहरा ने बताया कि इस नए रूट से न केवल यात्रियों को सस्ता किराया मिलेगा, बल्कि इससे सवारियों की संख्या भी बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “जब किराया कम होगा तो यात्री संख्या बढ़ेगी, जिससे लोड फैक्टर सुधरेगा और रोडवेज की आमदनी में इजाफा होगा।” उत्तराखंड रोडवेज की यह नई योजना यात्रियों और विभाग—दोनों के लिए ही फायदेमंद साबित हो सकती है। कम किराया, कम दूरी और समय की बचत जैसी सुविधाएं यात्रियों को प्राइवेट बसों के बजाय अब सरकारी वॉल्वो को चुनने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।