देहरादून: उत्तराखंड में शराब पर लगाए जाने वाले वैट (VAT) को लेकर चल रहा असमंजस अब खत्म हो गया है। आबकारी विभाग ने वैट निर्धारण में की गई चूक को स्वीकार करते हुए आखिरकार इसे ठीक कर दिया है। नई व्यवस्था लागू होने से राज्य में शराब महंगी होगी और सरकार को मिलने वाला राजस्व पहले की तुलना में बढ़ जाएगा।
Liquor will be expensive in Uttarakhand
आबकारी विभाग ने शराब पर वैट को एक्साइज ड्यूटी से पहले ही जोड़कर लागू कर दिया था, जबकि सामान्य नियम यह है कि वैट हमेशा अंतिम चरण में लगाया जाता है। इस गलती के कारण राज्य की कुल शराब बिक्री से होने वाला राजस्व अपेक्षा से कम हो रहा था। क्योंकि एक्साइज ड्यूटी पर लगने वाला वैट राज्य सरकार को मिल ही नहीं पा रहा था। वित्त विभाग ने जब इस विसंगति पर गंभीर आपत्ति उठाते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी, तब जाकर मामला सामने आया और आबकारी विभाग को अपना वैट फार्मूला संशोधित करना पड़ा।
एक्साइज ड्यूटी पर 12 प्रतिशत वैट
प्रमुख सचिव आबकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, बीते कई महीनों से इस मुद्दे पर शासन स्तर पर गहन मंथन चल रहा था। वित्त विभाग का स्पष्ट तर्क था कि वैट को एक्साइज ड्यूटी से पहले लगाने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि इससे राजस्व में सीधी कमी आती है। यह स्थिति सरकार के लिए चिंताजनक थी, विशेषकर तब जब आबकारी विभाग वित्त वर्ष 2025-26 में शराब बिक्री से 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित करने का दावा कर चुका था। अंततः वित्त विभाग की आपत्तियों के आधार पर आबकारी विभाग ने संशोधन करते हुए यह आदेश जारी किया कि अब एक्साइज ड्यूटी पर भी 12 प्रतिशत की दर से वैट लगाया जाएगा। इसका अर्थ है कि वैट को उसकी सही स्थिति पर वापस रखते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी गई है।
राजस्व बढ़ोतरी की उम्मीद
इस बदलाव का सीधा असर उपभोक्ताओं पर देखने को मिलेगा। एक्साइज ड्यूटी पर वैट लगने से शराब की कीमतें अब पहले की तुलना में बढ़ जाएंगी। कीमतों में इस बढ़ोतरी का प्रभाव शराब की बिक्री पर भी पड़ सकता है और बाजार में थोड़ी सुस्ती देखने को मिल सकती है। हालांकि, सरकार के लिए यह बदलाव सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि संशोधित वैट व्यवस्था से राज्य को मिलने वाला राजस्व अब पहले की तुलना में अधिक होगा, जिससे प्रदेश की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी। इसके बावजूद, ध्यान देने वाली बात यह है कि वैट निर्धारण में हुई प्रारंभिक गलती से राज्य को जो राजस्व नुकसान हुआ, उस पर न तो विभाग और न ही सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट टिप्पणी की गई है।