उत्तराखंड देहरादूनTransgender children are being neglected in Uttarakhand

उत्तराखंड में ट्रांसजेंडर बच्चों की अनदेखी, छात्रवृत्ति योजना अब तक बेअसर

उत्तराखंड में ट्रांसजेंडर बच्चों के संरक्षण और समावेशन को लेकर राज्य सरकार ने पहल तेज की है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, पहचान और छात्रवृत्ति योजनाओं में गंभीर खामियां सामने आईं।

Uttarakhand transgender children: Transgender children are being neglected in Uttarakhand
Image: Transgender children are being neglected in Uttarakhand (Source: Social Media)

देहरादून: उत्तराखंड में जन्म से ट्रांसजेंडर और ट्रांसजेंडर पहचान के साथ रह रहे बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने ठोस पहल शुरू कर दी है। इसी क्रम में उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मंगलवार को संबंधित विभागों के अधिकारियों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों के साथ एक अहम बैठक की।

Transgender children are being neglected in Uttarakhand

इस बैठक में ट्रांसजेंडर बच्चों के संरक्षण, समावेशन और समग्र विकास में आ रही चुनौतियों पर गहन मंथन किया गया। बैठक में सामने आया कि समाज कल्याण विभाग द्वारा चलाई जा रही ट्रांसजेंडर बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजना का अब तक एक भी बच्चे ने लाभ नहीं लिया है। विभाग के अनुसार, कक्षा 9वीं और 10वीं के ट्रांसजेंडर बच्चों को 13,500 रुपये प्रति वर्ष छात्रवृत्ति दी जा रही है, लेकिन जानकारी और पंजीकरण की कमी के कारण योजना जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं हो पाई है।

मानसिक यातना और सामाजिक भेदभाव बड़ी बाधा

बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना ने कहा कि ट्रांसजेंडर बच्चे जन्म से ही तानों, सामाजिक कुरितियों और मानसिक यातना का सामना करते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि उन्हें बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षित वातावरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में विशेष सहयोग मिले। उन्होंने कहा कि पहचान पत्र, दस्तावेजीकरण, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, पारिवारिक अस्वीकार्यता, परित्याग, संस्थागत देखभाल, उत्पीड़न और हिंसा—ये सभी गंभीर चुनौतियां हैं।

सजेंडर प्रतिनिधियों ने रखी जमीनी सच्चाई

ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रतिनिधि ओशीन और अदिति ने बताया कि समाज में उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और पारिवारिक समावेशन आज भी सहजता से नहीं मिल पाता। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रांसजेंडर पर्सन्स (Protection of Rights) Act, 2019 लागू होने के बावजूद कई शिक्षण संस्थानों में आईडी कार्ड और नामांकन फॉर्म में ट्रांसजेंडर का विकल्प उपलब्ध नहीं है, जिससे उन्हें महिला या पुरुष श्रेणी में नामांकन के लिए मजबूर होना पड़ता है।

राज्य में करीब 1000 ट्रांसजेंडर, प्रमाणित केवल 76

समाज कल्याण विभाग ने बताया कि राज्य में अनुमानित करीब 1000 ट्रांसजेंडर हैं, लेकिन पिछले 6 वर्षों में केवल 76 ट्रांसजेंडरों का ही पंजीकरण और प्रमाणन हो पाया है। इसका मुख्य कारण पहचान उजागर करने का भय और सामाजिक दबाव है। विभाग ने पारिवारिक और व्यक्तिगत काउंसलिंग की आवश्यकता पर जोर दिया।

ट्रांसजेंडर बच्चों के लिए कोई ‘गरिमा गृह’ नहीं

बाल कल्याण समिति ने बताया कि अन्य राज्यों में ट्रांसजेंडर वयस्कों के लिए गरिमा गृह संचालित हैं, लेकिन उत्तराखंड में ट्रांसजेंडर बच्चों के लिए कोई सुरक्षित गृह उपलब्ध नहीं है। इस पर आयोग अध्यक्ष ने बाल विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग और बाल कल्याण समिति के समन्वय से फिट फैसिलिटी (सुरक्षित गृह) विकसित करने के निर्देश दिए।

AIIMS ऋषिकेश में ट्रांसजेंडर क्लीनिक की तैयारी

एम्स ऋषिकेश के डॉक्टरों ने बताया कि संस्थान में ट्रांसजेंडर बच्चों और उनके अभिभावकों की काउंसलिंग, हार्मोन थेरेपी और सर्जरी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही एक पृथक ट्रांसजेंडर क्लीनिक स्थापित करने की प्रक्रिया भी चल रही है।

यू-डाईस पोर्टल पर नामांकन बेहद कम

शिक्षा विभाग ने जानकारी दी कि यू-डाईस पोर्टल पर पूरे राज्य में केवल 3 ट्रांसजेंडर बच्चे ही नामांकित हैं। जानकारी के अभाव और सामाजिक असंवेदनशीलता के कारण विद्यालयों में नामांकन नहीं हो पा रहा है।

कानूनी अधिकार हैं, जागरूकता की कमी

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) ने बताया कि NALSA बनाम भारत संघ (2014) में सुप्रीम कोर्ट ने थर्ड जेंडर को मूल अधिकारों में शामिल किया। ट्रांसजेंडर पर्सन्स एक्ट, 2019 के तहत उनके अधिकार संरक्षित हैं। हालांकि, जागरूकता की भारी कमी है। ओडिशा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में ट्रांसजेंडर बच्चों के पारिवारिक समावेशन के लिए आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है, जिसे उत्तराखंड में भी लागू करने की आवश्यकता बताई गई।

दिशा-निर्देश बनाने के निर्देश

सभी विभागों से प्राप्त फीडबैक के बाद आयोग अध्यक्ष गीता खन्ना ने महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के साथ समन्वय कर ट्रांसजेंडर बच्चों के लिए राज्य स्तरीय दिशा-निर्देश तैयार करने हेतु उच्च स्तरीय बैठक बुलाने के निर्देश दिए।