देहरादून: उत्तराखंड में बेरोजगारी और रोजगार की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए केंद्र सरकार द्वारा पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) फरवरी 2026 से शुरू किया जा रहा है। यह सर्वे दिसंबर 2026 तक चलेगा और इसका उद्देश्य राज्य में श्रम बाजार की वास्तविक तस्वीर सामने लाना है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर यह अध्ययन किया जाएगा, ताकि रोजगार से जुड़े ठोस और प्रमाणिक आंकड़े जुटाए जा सकें।
Unemployment report in Uttarakhand to Be Revealed by PLFS
दरअसल, पीएलएफएस केंद्र सरकार द्वारा कराया जाने वाला एक राष्ट्रीय सर्वे है, जिसके माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि कितने लोग रोजगार में हैं, कितने लोग काम की तलाश में हैं और श्रम बाजार में वास्तविक भागीदारी कितनी है। इस सर्वे के आधार पर देश और राज्यों की बेरोजगारी दर, श्रम बल भागीदारी दर और अन्य आर्थिक संकेतकों का निर्धारण किया जाता है। यही आंकड़े आगे चलकर सरकार की रोजगार और आर्थिक नीतियों की दिशा तय करते हैं।
हर जिले में 28 इकाइयों का चयन
जनपद स्तर पर इस सर्वे के लिए कुल 28 इकाइयों का चयन किया गया है। इनमें 16 ग्रामीण इकाइयां और 12 शहरी इकाइयां शामिल हैं। चयनित क्षेत्रों में विभागीय कर्मचारी घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर वर्ग और आयु समूह के लोगों से सही और सटीक जानकारी प्राप्त हो सके।
CAPI माध्यम से ऑनलाइन दर्ज होंगे आंकड़े
सर्वे के तहत विभागीय कर्मचारी चयनित परिवारों के मुखिया और अन्य सदस्यों से सीधे बातचीत कर जानकारी एकत्र करेंगे। सभी आंकड़े CAPI (Computer-Assisted Personal Interviewing) प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज किए जाएंगे। डिजिटल माध्यम से डेटा संग्रहित करने का उद्देश्य पारदर्शिता और सटीकता बनाए रखना है। एकत्रित जानकारी को राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
किन लोगों से ली जाएगी जानकारी?
सर्वे में विशेष रूप से 15 से 59 वर्ष आयु वर्ग के स्वस्थ और काम करने के इच्छुक लोगों की जानकारी ली जाएगी। इसमें उनकी शिक्षा, रोजगार या बेरोजगारी की स्थिति, मासिक पारिवारिक व्यय और कार्य के दिनों से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। पिछले 365 दिनों में कितने दिन काम किया, एक महीने में कितने दिन काम किया और एक सप्ताह में कितने घंटे काम किया — इन सभी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि यदि किसी व्यक्ति ने एक घंटे भी काम किया है, तो उसे रोजगार की श्रेणी में माना जाएगा। किसी भी आर्थिक गतिविधि से प्राप्त आय को रोजगार के रूप में दर्ज किया जाएगा।
किन प्रमुख संकेतकों का होगा आकलन?
इस सर्वे के जरिए श्रम बल भागीदारी दर (LFPR), वर्कर पॉपुलेशन रेशियो (WPR), बेरोजगारी दर और करंट वीकली स्टेटस (CWS) जैसे महत्वपूर्ण संकेतकों का आकलन किया जाएगा। इन आंकड़ों के आधार पर यह तय होगा कि राज्य में रोजगार की स्थिति कितनी मजबूत है और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
आज से शुरू होगा सर्वे
जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी, पौड़ी राम सलोने के अनुसार, केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत 11 फरवरी 2026 से सर्वे की शुरुआत की जाएगी। सहायक संख्याधिकारी द्वारा रोजगार एवं आजीविका की स्थिति का व्यापक अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह सर्वे प्रदेश की रोजगार स्थिति को समझने और भविष्य की नीतियों को प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
रोजगार नीतियों के लिए अहम साबित होगा सर्वे
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सर्वे प्रदेश में रोजगार की वास्तविक तस्वीर सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस वर्ग को रोजगार की अधिक आवश्यकता है, किन क्षेत्रों में रोजगार सृजन की संभावनाएं हैं और किन योजनाओं को मजबूत करने की जरूरत है।
रोजगार और बेरोजगारी के सटीक आंकड़े सामने आने के बाद राज्य और केंद्र सरकार भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी और लक्ष्य आधारित बना सकेंगी।