उत्तराखंड उत्तरकाशीCouple Marries as Shiva and Parvati During Shiv Mahapuran Katha

उत्तरकाशी: दूल्हा बना शिव, दुल्हन बनी पार्वती, महापुराण में वासुकी नाग के सानिध्य में हुआ पवित्र विवाह

उत्तरकाशी जिले में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान एक युवक और युवती ने शिव-पार्वती स्वरूप में विधि-विधान के साथ विवाह संस्कार पूरे किए। कथा के पांचवें दिन शिव-पार्वती विवाह प्रसंग के दौरान यह विशेष आयोजन किया गया..

Uttarkashi unique wedding: Couple Marries as Shiva and Parvati During Shiv Mahapuran Katha
Image: Couple Marries as Shiva and Parvati During Shiv Mahapuran Katha (Source: Social Media)

उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में एक अनोखी और धार्मिक परंपराओं से जुड़ी शादी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। भटवाड़ी ब्लॉक के नाल्ड गांव में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान एक युवक और युवती ने शिव-पार्वती स्वरूप में विधि-विधान के साथ विवाह संस्कार पूरे किए। कथा के पांचवें दिन शिव-पार्वती विवाह प्रसंग के दौरान यह विशेष आयोजन किया गया, जिसने पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उत्साह और सामाजिक एकता का अनोखा उदाहरण पेश किया।

Couple Marries as Shiva and Parvati During Shiv Mahapuran Katha

नाल्ड गांव में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के बीच योगेंद्र पंवार और शिवानी ने शिव-पार्वती के रूप में विवाह रचाया। गांव के पूर्व प्रधान सुनील राणा के अनुसार, कथा में शिव-पार्वती विवाह प्रसंग के दिन इसे वास्तविक रूप देने का विचार सामने आया। कथावाचक डॉ. राधेश्याम खंडूड़ी ने व्यासपीठ से सुझाव दिया कि यदि किसी जोड़े का विवाह इसी स्वरूप में कराया जाए तो यह अत्यंत पुण्य और प्रेरणादायक कार्य होगा। इसके बाद गांव में ऐसे जोड़े की तलाश शुरू हुई जिनका रिश्ता तय हो चुका हो।

  • पहले से तय था योगेंद्र और शिवानी का रिश्ता

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    गांव के योगेंद्र पंवार के परिजनों ने बताया कि उनका रिश्ता रवाड़ा गांव निवासी शिवानी के साथ तय हो चुका है, लेकिन शादी की कोई निश्चित तिथि तय नहीं हुई थी। ग्रामीणों और दोनों परिवारों की सहमति के बाद तय किया गया कि योगेंद्र और शिवानी का विवाह शिव-पार्वती स्वरूप में कथा पंडाल में ही कराया जाएगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शिवानी अपने परिवार के साथ नाल्ड गांव पहुंचीं।

  • शिव-पार्वती स्वरूप में हुआ विवाह

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    कथा पंडाल में दुल्हन शिवानी को पार्वती स्वरूप में सजाया गया, जबकि योगेंद्र पंवार भगवान शिव के परिधान में बारातियों के साथ पंडाल पहुंचे। धार्मिक माहौल, मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच दोनों ने वासुकी नाग देवता की देवडोली के सानिध्य में सात फेरे लिए। इस प्रकार योगेंद्र और शिवानी विवाह के पवित्र बंधन में बंध गए। समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु मौजूद रहे।

  • अवर अभियंता के पद पर तैनात हैं दूल्हा

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    दूल्हा योगेंद्र पंवार नाल्ड गांव, भटवाड़ी ब्लॉक के निवासी हैं। वर्तमान में वे ग्रामीण निर्माण विभाग में टिहरी जिले के घनसाली में अवर अभियंता (JE) के पद पर तैनात हैं। वहीं दुल्हन शिवानी वर्तमान में कॉलेज छात्रा हैं और रवाड़ा गांव की निवासी हैं। योगेंद्र पंवार ने कहा “हमारा सिर्फ रिश्ता पक्का हुआ था, लेकिन शादी की कोई योजना नहीं थी। शिव महापुराण कथा के दौरान शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग था, ऐसे में हमने उसी स्वरूप में विवाह कर लिया। कथा भी हो गई और हमारा विवाह भी हो गया। यह हमारे लिए अविस्मरणीय क्षण है।” उन्होंने बताया कि कथावाचक डॉ. राधेश्याम खंडूड़ी के मार्गदर्शन में यह विवाह संपन्न हुआ।

    इस अनोखी शादी ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आयोजनों के बीच भी सामाजिक संस्कारों को गरिमा और श्रद्धा के साथ निभाया जा सकता है। शिव-पार्वती स्वरूप में हुआ यह विवाह न केवल एक व्यक्तिगत जीवन का नया अध्याय बना, बल्कि गांव के लिए भी यादगार धार्मिक आयोजन साबित हुआ।