देहरादून: देहरादून अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की वित्तीय स्थिति तब चर्चा में आई जब बैंक की आर्थिक हालत बेहद खराब पाई गई। हालात इतने बिगड़ गए कि Reserve Bank of India को हस्तक्षेप करना पड़ा। खाताधारकों ने बैंक प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए चेयरमैन और सचिव की अनदेखी को भी जिम्मेदार ठहराया।
Dehradun Urban Cooperative Bank Loan Scam Exposed
बैंक के मौजूदा सचिव Birbal के अनुसार, यह पूरा मामला 24 व्यक्तियों को जेसीबी (बैक हो लोडर) मशीन के लिए दिए गए ऋण से जुड़ा है। इन ऋणों में आवश्यक बैंक एंट्री नहीं की गई और नियमों की अनदेखी की गई। परिणामस्वरूप सभी ऋण फँस गए और बैंक को भारी नुकसान उठाना पड़ा। पूर्व जांच में तत्कालीन सचिव आरके बंसल और प्रबंधक संजय गुप्ता को दोषी पाया गया था।
चेयरमैन मयंक ममगाईं का दावा
बैंक चेयरमैन Mayank Mamgain का कहना है कि यह घोटाला वर्ष 2013-14 में हुआ था और इसके लिए पूर्व सचिव व तत्कालीन अधिकारी जिम्मेदार हैं। हालांकि, मौजूदा प्रबंधन आरोपों को स्वीकार करने से बचता नजर आ रहा है।
आर्बिट्रेशन में गया मामला, अब विरासतधारी भी पक्षकार
मामला आर्बिट्रेशन तक पहुंचा, लेकिन तत्कालीन सचिव की मृत्यु हो चुकी है। उनकी पत्नी ने अपील दायर की है, जबकि विरासत उनके बेटे को मिली है। अब वसूली की प्रक्रिया में उन्हें भी पक्षकार बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, संजय गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
बैंक गारंटी पर भी बड़ा सवाल
मामले में नया मोड़ तब आया जब एक शराब कारोबारी ने आबकारी विभाग को लगभग आठ करोड़ रुपये की बैंक गारंटी सौंपी। बताया जा रहा है कि पांच करोड़ रुपये की एफडी के सापेक्ष यह गारंटी जारी की गई थी और इसमें भी अनियमितता की आशंका जताई जा रही है। जिला आबकारी अधिकारी Virendra Joshi टीम के साथ बैंक पहुंचे और गारंटी की सत्यता जांची। हालांकि, गारंटी को भुनाने की प्रक्रिया को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। अब आबकारी विभाग बैंक को नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है।