उत्तराखंड देहरादूनEyewitness Describes Dehradun Shooting That Killed Retired Brigadier

देहरादून में कैसे हुई ब्रिगेडियर की हत्या, चश्मदीद ने बताया खौफनाक मंजर..जानिए पूरी दास्तान

देहरादून के राजपुर रोड गोलीकांड में प्रत्यक्षदर्शी S P Sharma ने बताया कि तेज रफ्तार कारों और फायरिंग के बीच रिटायर्ड ब्रिगेडियर Mukesh Joshi गोली का शिकार हो गए। घटना ने इलाके में दहशत फैला दी है।

Dehradun Rajpur Road firing: Eyewitness Describes Dehradun Shooting That Killed Retired Brigadier
Image: Eyewitness Describes Dehradun Shooting That Killed Retired Brigadier (Source: Social Media)

देहरादून: देहरादून के राजपुर रोड गोलीकांड में प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कैसे तेज रफ्तार कारों और फायरिंग के बीच रिटायर्ड ब्रिगेडियर की मौत हो गई। जोहड़ी क्षेत्र में हुई गोलीबारी का खौफनाक मंजर अब सामने आ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों ने उस सुबह की पूरी घटना को याद करते हुए बताया कि यह हादसा अभी भी उनकी आंखों के सामने घूम रहा है।

Eyewitness Describes Dehradun Shooting That Killed Retired Brigadier

प्रत्यक्षदर्शी एसपी शर्मा के अनुसार, बीते सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे वह सोसाइटी के अध्यक्ष रिटायर्ड ब्रिगेडियर Mukesh Joshi और एक अन्य साथी के साथ मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। तभी सामने से दो कारें करीब 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उनकी ओर आती दिखाई दीं। स्थिति इतनी भयावह थी कि सभी को लगा कि कारें उन्हें टक्कर मार सकती हैं। कारों से बचने के लिए सभी लोग सड़क किनारे भागे ही थे कि अचानक गोलियों की आवाज गूंजने लगी। बताया गया कि स्कॉर्पियो में सवार लोगों ने फायरिंग शुरू कर दी। इसी दौरान ब्रिगेडियर मुकेश जोशी को गोली लग गई और वह जमीन पर गिर पड़े। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार गोली सीधे ब्रिगेडियर के सीने में लगी थी। उन्होंने कहा कि हालात इतने बेकाबू थे कि गोली किसी को भी लग सकती थी, लेकिन दुर्भाग्यवश ब्रिगेडियर इसकी चपेट में आ गए।आगे पढ़िए..

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अगर और लोग होते तो शायद बच जाते

एसपी शर्मा ने बताया कि आमतौर पर मॉर्निंग वॉक के लिए 5-6 लोग साथ जाते हैं, लेकिन उस दिन केवल तीन लोग ही मौजूद थे। उन्होंने कहा कि अगर बाकी लोग भी साथ होते, तो संभव है कि ब्रिगेडियर की स्थिति अलग होती और शायद वह बच सकते थे। घटना के बाद से एसपी शर्मा बेहद सदमे में हैं। उन्होंने बताया कि पूरी रात वह सो नहीं पाए और गोलियों की आवाज आज भी उनके कानों में गूंज रही है।