देहरादून: देहरादून के एक मैनेजमेंट कॉलेज से MBA की पढ़ाई कर रहा छात्र आयुष चौधरी इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सोशल मीडिया पर उसकी पढ़ाई के लिए किडनी बेचने की कहानी तेजी से वायरल हो रही है। हालांकि, जब उसके अतीत की परतें खुलीं, तो यह मामला सिर्फ पैसों की मजबूरी का नहीं, बल्कि गलत फैसलों और बिगड़ती जिंदगी का भी निकला।
Ayush Chaudhary Kidney Case: From Bright Student to Troubled Life Story
जानकारी के अनुसार आयुष चौधरी बिहार राज्य के बेगूसराय जिले के भगवानपुर थाना क्षेत्र के औगान गांव का मूल निवासी है। औगान गांव के लोगों का कहना है कि आयुष बचपन से ही पढ़ाई में अच्छा था। उसने साल 2015 में प्रथम श्रेणी से इंटर पास किया था। उसके पिता राजेश चौधरी का सपना था कि बेटा डॉक्टर बने। इसी उम्मीद में उसे आगे की पढ़ाई के लिए विशाखापट्टनम भेजा गया, जहां वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने लगा। लेकिन यहीं से उसकी जिंदगी ने एक अलग मोड़ लेना शुरू कर दिया।
प्यार और गलत संगत ने बदली राह
विशाखापट्टनम में पढ़ाई के दौरान आयुष एक लड़की के संपर्क में आया। वह हर महीने गांव आता था और गलत संगत में पड़ गया, जिसके बाद धीरे-धीरे वह पढ़ाई से भटकने लगा। इसी दौरान उसे नशे की लत भी लग गई। हालात ऐसे बने कि उसकी प्रेमिका ने भी उसे छोड़ दिया। यह समय उसके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जहां से वह लगातार गलत दिशा में बढ़ता चला गया। आगे पढ़िए..
पिता ने की आत्महत्या, पत्नी ने छोड़ा
आयुष की बिगड़ती आदतों और व्यवहार से परेशान होकर उसके पिता राजेश चौधरी ने साल 2017 में आत्महत्या कर ली। यह घटना पूरे परिवार के लिए बहुत बड़ा झटका थी। उसकी मां रीता देवी ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन आयुष ने उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया। पिता की मौत के कुछ ही महीनों बाद उसने परिवार की जमीन बेचनी शुरू कर दी और करीब 18 बीघा जमीन बेच डाली। पिता की मौत के बाद भी आयुष की जिंदगी में स्थिरता नहीं आई। सोशल मीडिया के जरिए उसकी मुलाकात यूपी की एक एयर होस्टेस से हुई और दोनों के बीच प्यार हो गया। आयुष ने देवघर में उससे शादी भी की। शादी के बाद कुछ समय तक वह गांव में रहा, लेकिन उसकी आदतें नहीं बदलीं। लगातार खर्च और जमीन बेचने की वजह से उसकी पत्नी परेशान हो गई और आखिरकार उसे छोड़कर चली गई।
परिवार से दूरी और अकेली जिंदगी
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साल 2021 में आयुष एक बार फिर गांव लौटा, लेकिन इस बार उसे अपने ही घर में जगह नहीं मिली। उसके छोटे भाई ने उसे घर में रखने से मना कर दिया। इसके बाद आयुष गांव छोड़कर चला गया और फिर कभी वापस नहीं आया। परिवार से उसके रिश्ते लगभग खत्म हो चुके हैं और उसकी मां भी अब अकेले जीवन जी रही हैं।
किडनी खरीद-फरोख्त का मामला
अब बीते 30 मार्च को कानपुर में किडनी खरीद-फरोख्त का एक मामला सामने आया, जिसमें आयुष का नाम जुड़ा। उस समय वह देहरादून के एक मैनेजमेंट कॉलेज से MBA की पढ़ाई कर रहा था। उसने बताया कि उसने 9 लाख रुपये में अपनी किडनी बेचने का सौदा किया था, लेकिन ऑपरेशन के बाद उसे केवल 3.5 लाख रुपये ही मिले।
सोशल मीडिया के जरिए आया मामला सामने
भगवानपुर थाना पुलिस के अनुसार, यह मामला फिलहाल सोशल मीडिया के जरिए ही सामने आया है। पुलिस को अभी तक किसी साइबर फ्रॉड या आधिकारिक शिकायत की जानकारी नहीं मिली है। न ही किसी थाने द्वारा इस मामले में कोई औपचारिक सूचना दी गई है और न ही अब तक घर पर जांच के लिए टीम पहुंची है।