हरिद्वार: हरिद्वार में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना को लेकर सरकार ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। यह प्रोजेक्ट शहर की बढ़ती ट्रैफिक समस्या को कम करने के साथ-साथ तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को आधुनिक और सुरक्षित परिवहन सुविधा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हर साल लाखों श्रद्धालुओं के आगमन के कारण हरिद्वार में यातायात व्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है, जिसे यह रोपवे काफी हद तक नियंत्रित कर सकता है।
Ropeway Project in Haridwar
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने परियोजना की प्रगति का विस्तृत आकलन किया। बैठक में लागत, भूमि हस्तांतरण, कन्सेशन अवधि और वित्तीय व्यवहार्यता जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए।
PPP मॉडल और DBFOT सिस्टम से होगा निर्माण
इस परियोजना का निर्माण उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के माध्यम से पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर किया जाएगा। यह योजना DBFOT (Design, Build, Finance, Operate, Transfer) मॉडल पर आधारित होगी, जिसमें निजी कंपनियां प्रोजेक्ट का निर्माण, निवेश और संचालन करेंगी, और निर्धारित अवधि के बाद इसे सरकार को सौंप दिया जाएगा। इस मॉडल से सरकारी खर्च कम होता है और प्रोजेक्ट के समय पर पूरा होने की संभावना बढ़ जाती है।
लागत का पूरा विवरण: 75 करोड़ प्रति किलोमीटर
परियोजना की लागत को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, रोपवे के निर्माण की अनुमानित लागत लगभग 75 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर होगी। हालांकि यह केवल बेसिक स्ट्रक्चर की लागत है। इसमें भूमि अधिग्रहण, रोपवे स्टेशन निर्माण, वर्कशॉप और अन्य आवश्यक क्लीयरेंस शामिल नहीं हैं। इन सभी को जोड़ने पर कुल लागत और अधिक बढ़ सकती है।
जमीन का मुद्दा: यूपी सिंचाई विभाग से जुड़ा मामला
इस परियोजना के लिए आवश्यक भूमि फिलहाल उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के स्वामित्व में है, जो एक बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बना हुआ है। सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि इस जमीन को 99 वर्षों की लीज पर मात्र 1 रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से उत्तराखंड को हस्तांतरित किया जाए। सचिव आवास ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि इस प्रक्रिया को तेज करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को पुनः पत्र भेजा जाए। आगे पढ़िए
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कन्सेशन अवधि बढ़ाने पर विचार
वर्तमान में इस परियोजना के लिए 30 वर्षों की कन्सेशन अवधि निर्धारित की गई है। लेकिन प्रोजेक्ट की उच्च लागत को देखते हुए इसे बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव है कि इसे अतिरिक्त 30 वर्ष (कुल 60 वर्ष) तक बढ़ाया जा सकता है, जिसे दो चरणों में लागू किया जाएगा। इससे निजी निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी और परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता भी बेहतर होगी।
ट्रैफिक और पर्यटन को मिलेगा बड़ा फायदा
इस रोपवे प्रोजेक्ट से हरिद्वार को कई बड़े फायदे मिलने की उम्मीद है। इससे शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और तीर्थयात्रियों को एक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन विकल्प मिलेगा। इसके अलावा, यह परियोजना पर्यटन को भी बढ़ावा देगी और शहर की छवि को एक आधुनिक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करेगी।
अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश
समीक्षा बैठक में सचिव आवास ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं तेजी से पूरी की जाएं। खासतौर पर डीपीआर (Detailed Project Report), भूमि हस्तांतरण और वित्तीय व्यवस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के लिए कहा गया है। साथ ही सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया गया।