उत्तराखंड देहरादूनDehradun Delhi Expressway Records 40000 Wildlife Crossings

Delhi-Dehradun expressway: देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे के नाम नया रिकॉर्ड, 40 हजार तस्वीरों से मिला शुभ संकेत

Dehradun-Delhi Expressway: देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे पर 40 हजार से अधिक तस्वीरों में 18 वन्य प्रजातियों द्वारा अंडरपास के उपयोग का प्रमाण मिला है। यह परियोजना दिखाती है कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा संभव है।

Delhi-Dehradun expressway: Dehradun Delhi Expressway Records 40000 Wildlife Crossings
Image: Dehradun Delhi Expressway Records 40000 Wildlife Crossings (Source: Social Media)

देहरादून: देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे ने एक नया रिकॉर्ड बनाते हुए विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की शानदार मिसाल पेश की है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की संयुक्त रिपोर्ट “Landscapes Reconnected” में खुलासा हुआ है कि इस कॉरिडोर पर वन्यजीवों की गतिविधियों के 40 हजार से अधिक तस्वीरें दर्ज की गई हैं। यह आंकड़ा इस बात का मजबूत संकेत है कि हाईवे निर्माण के साथ-साथ प्रकृति को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

Dehradun–Delhi Expressway Records 40,000 Wildlife Crossings

रिपोर्ट के अनुसार, इस एक्सप्रेस-वे पर बनाए गए अंडरपास का उपयोग 18 अलग-अलग वन्य प्रजातियां कर रही हैं। कैमरा ट्रैप के जरिए ली गई 40,444 तस्वीरों में मांसाहारी, शाकाहारी, खुर वाले जानवर, तीतर और बंदर जैसे कई जीव शामिल हैं। यह दर्शाता है कि जानवर अब इन संरचनाओं को अपने प्राकृतिक मार्ग के रूप में स्वीकार कर रहे हैं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि गोल्डन जैकाल सबसे अधिक बार अंडरपास में दिखाई दिया, जबकि नीलगाय, सांभर और चित्तीदार हिरण भी लगातार इनका उपयोग कर रहे हैं। खास बात यह रही कि हाथियों द्वारा 60 बार सुरक्षित क्रॉसिंग दर्ज की गई, जो इस परियोजना की सफलता का बड़ा संकेत है। इससे स्पष्ट होता है कि बड़े और संवेदनशील वन्यजीव भी इस नई व्यवस्था के साथ सहज हो रहे हैं।

18 किलोमीटर में फैला अनोखा कॉरिडोर

यह अध्ययन गणेशपुर और आशारोड़ी के बीच लगभग 18 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में किया गया। इस हिस्से में करीब 10.97 किलोमीटर लंबा अंडरपास सिस्टम तैयार किया गया है, जिसकी औसत ऊंचाई 6 से 7 मीटर रखी गई है। यह एशिया के सबसे बड़े वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर में से एक माना जा रहा है, जिसे खास तौर पर जानवरों की निर्बाध आवाजाही के लिए डिजाइन किया गया है।आगे पढ़िए

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ध्वनि प्रबंधन भी बना अहम कारक

रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि ध्वनि स्तर वन्यजीवों के व्यवहार को प्रभावित करता है। जहां गोल्डन जैकाल और जंगली सूअर जैसे जानवर शोर के अनुकूल हो गए हैं, वहीं हाथी और चित्तीदार हिरण जैसे संवेदनशील जीव कम शोर वाले अंडरपास का चयन करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में साउंड बैरियर जैसी तकनीकों से इन मार्गों को और सुरक्षित बनाया जा सकता है।

विकास और पर्यावरण का संतुलन

देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे का यह मॉडल दिखाता है कि यदि योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए तो विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। इस परियोजना से न केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आई है, बल्कि शिवालिक क्षेत्र में जैव विविधता को भी मजबूती मिली है।