देहरादून: रामलला की नगरी अयोध्या में अब उत्तराखंड की खास पहचान देखने को मिलेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ड्रीम प्रोजेक्ट जल्द ही जमीन पर उतरने जा रहा है। इस परियोजना के तहत उत्तराखंड सरकार अयोध्या-फैजाबाद हाईवे पर एक भव्य राज्य अतिथि गृह का निर्माण करेगी। यह सिर्फ एक भवन नहीं होगा, बल्कि उत्तराखंड और अयोध्या के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक बनेगा।
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यह अतिथि गृह लगभग 54,000 वर्ग फीट के बड़े क्षेत्र में बनाया जाएगा। परियोजना को लेकर सरकार पूरी तरह गंभीर है और अधिकारियों को निर्माण की गुणवत्ता और समयसीमा को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं। हाल ही में संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर स्पष्ट कर दिया है कि काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस गेस्ट हाउस की लोकेशन इसकी सबसे बड़ी खासियत है। यह श्री राम मंदिर से मात्र 6.6 किलोमीटर और अयोध्या एयरपोर्ट से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा। इससे श्रद्धालुओं को दर्शन और यात्रा में काफी सुविधा मिलेगी। चाहे सुबह की आरती हो या शाम का दीपदान, यात्री आसानी से समय पर पहुंच सकेंगे। आगे पढ़िए..
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आम श्रद्धालुओं के लिए किफायती ठहराव
इस परियोजना को पूरी तरह जनहित को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। यहां आम श्रद्धालुओं के लिए किफायती दरों पर कमरे उपलब्ध होंगे। खासकर उत्तराखंड के दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों को सुरक्षित, साफ-सुथरा और सुविधाजनक ठहराव मिलेगा, जिससे उनकी यात्रा और भी आसान हो जाएगी। यह अतिथि गृह केवल ठहरने की जगह नहीं होगा, बल्कि एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। यहां उत्तराखंड की लोक कला, संगीत और पारंपरिक उत्सवों के आयोजन किए जाएंगे। समय-समय पर मेले लगाए जाएंगे, जहां लोग पहाड़ी खान-पान और हस्तशिल्प का आनंद ले सकेंगे। इस परिसर में शादी और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन की भी सुविधा होगी। जो लोग अयोध्या में पहाड़ी रीति-रिवाजों के साथ विवाह या अन्य कार्यक्रम करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक आदर्श स्थान बनेगा।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
अयोध्या में इस परियोजना के बनने से उत्तराखंड की ब्रांडिंग को बढ़ावा मिलेगा। लाखों श्रद्धालुओं के बीच राज्य की संस्कृति को पहचान मिलेगी, जिससे पर्यटन और अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ होगा। यह परियोजना धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक कनेक्ट को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस परियोजना में न तो देरी बर्दाश्त की जाएगी और न ही गुणवत्ता से समझौता किया जाएगा। यह अतिथि गृह उत्तराखंड की पहचान और उसकी संस्कृति का प्रतीक बनकर उभरेगा।