उत्तराखंड नैनीतालSchool Timings Changed in Nainital Due to Heatwave

Uttarakhand news: उत्तराखंड के इस जिले में बदली स्कूलों की टाइमिंग, अब 1 घंटे पहले जाना पड़ेगा; आदेश जारी

बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए जिले में स्कूलों का समय बदल दिया गया है। अब स्कूल सुबह 6:45 बजे खुलेंगे और दोपहर 1 बजे छुट्टी होगी।

Uttarakhand school timing change: School Timings Changed in Nainital Due to Heatwave
Image: School Timings Changed in Nainital Due to Heatwave (Source: Social Media)

नैनीताल: उत्तराखंड के Nainital जिले में भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए शिक्षा विभाग ने स्कूलों की टाइमिंग में बड़ा बदलाव किया है। बढ़ते तापमान के कारण दोपहर के समय बाहर निकलना मुश्किल हो रहा था, जिससे छात्रों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया।

School Timings Changed in Nainital Due to Heatwave

नई व्यवस्था के तहत अब सभी सरकारी और निजी विद्यालय सुबह 7:45 बजे की बजाय 6:45 बजे खुलेंगे। यह बदलाव शनिवार से लागू कर दिया गया है। पहले की तुलना में स्कूल एक घंटा पहले शुरू होंगे, जिससे बच्चों को तेज धूप से बचाया जा सके। केवल स्कूल खुलने का समय ही नहीं, बल्कि छुट्टी का समय भी बदल दिया गया है। पहले स्कूलों में दोपहर 2:05 बजे छुट्टी होती थी, लेकिन अब यह समय घटाकर दोपहर 1:00 बजे कर दिया गया है। इससे छात्रों को दोपहर की तेज गर्मी और लू से राहत मिलेगी। यह नया नियम Haldwani, Ramnagar और Kotabagh सहित नैनीताल जिले के विभिन्न ब्लॉकों में लागू किया गया है। यह आदेश सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा। आगे पढ़िए..

ये भी पढ़ें:

शिक्षा विभाग का आधिकारिक आदेश

मुख्य शिक्षा अधिकारी की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। यह निर्णय मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी हीटवेव के पूर्वानुमान को देखते हुए लिया गया है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। शिक्षक संगठनों ने इस निर्णय का समर्थन किया है, लेकिन उन्होंने छोटे बच्चों के लिए अतिरिक्त राहत की मांग भी की है। प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व जिला मंत्री ने सुझाव दिया है कि कक्षा पांच तक के बच्चों की छुट्टी और पहले यानी दोपहर 12 बजे तक कर दी जानी चाहिए, ताकि उन्हें और अधिक सुरक्षा मिल सके।

क्यों जरूरी था यह फैसला

गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह बदलाव बेहद जरूरी माना जा रहा है। इससे न केवल बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचाया जा सकेगा, बल्कि पढ़ाई का माहौल भी सुरक्षित और अनुकूल बना रहेगा।