बागेश्वर: जिले में ट्रेल्स पास अभियान के दौरान 5,312 मीटर की ऊंचाई पर अचानक आए भीषण हिमस्खलन से 19 पर्वतारोही बाल-बाल बच गए। पर्वत की ऊंचाई पर मौजूद टीम ने तेजी से नीचे बढ़ते बर्फ के विशाल गुबार को देखकर समय रहते साथियों को चेताया। यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती तो बड़ा हादसा हो सकता था।
19 Trekkers Narrowly Escape Massive Avalanchein Bageshwar Himalayas
बागेश्वर जिले में हिमालय की दुर्गम चोटियों के बीच संचालित ट्रेल्स पास अभियान के दौरान ऐसा भयावह दृश्य सामने आया, जिसे देखकर अनुभवी पर्वतारोहियों के भी रोंगटे खड़े हो गए। करीब 5,312 मीटर की ऊंचाई पर अचानक आए विशाल हिमस्खलन ने पूरे अभियान को खतरे में डाल दिया। हालांकि समय रहते मिली चेतावनी के कारण अभियान में शामिल सभी 19 ट्रेकर सुरक्षित बच निकले।
कुछ ही सेकंड में बदल गया पूरा नजारा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पर्वत की ऊपरी ढलानों पर मौजूद टीम ने अचानक बर्फ का एक विशाल गुबार तेजी से नीचे की ओर बढ़ते देखा। देखते ही देखते पहाड़ की ऊपरी परत टूटने लगी और भारी गर्जना के साथ हजारों टन बर्फ नीचे की ओर बहने लगी। कुछ ही क्षणों में पूरा इलाका बर्फ की धूल और सफेद बादलों से ढक गया। दृश्य इतना भयावह था कि हर किसी की सांसें थम गईं। आगे विडियो देखिये..
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महज पांच सेकंड की चेतावनी ने बचा ली जान
अभियान से जुड़े पर्वतारोहियों के अनुसार ऊपर मौजूद टीम ने खतरे को पहचानते ही नीचे मौजूद साथियों को तत्काल सतर्क किया। यही कुछ सेकंड की चेतावनी सभी के लिए जीवनदान साबित हुई। बताया जा रहा है कि यदि सूचना मिलने में महज पांच सेकंड की भी देरी होती, तो हिमस्खलन सीधे ट्रेकर्स की टीम तक पहुंच जाता और बड़ा हादसा हो सकता था।
सुरक्षित लौटे सभी पर्वतारोही
5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में मौसम और बर्फ की स्थिति पलभर में बदल सकती है। तापमान में बदलाव, नई बर्फबारी, तेज हवाएं और ढलानों पर जमा बर्फ हिमस्खलन का कारण बन सकती है। इसी वजह से ऐसे अभियानों में अनुभवी गाइड, लगातार निगरानी और समय पर निर्णय लेना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस भयावह घटना के बावजूद राहत की बात यह रही कि अभियान में शामिल सभी 19 पर्वतारोही सुरक्षित हैं। समय पर मिली चेतावनी और टीम के त्वरित निर्णय ने एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया। ये विडियो देखिये...