रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड की बेटियां लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। इसी कड़ी में केदारघाटी के ग्राम लमगोंडी की होनहार बेटी वैष्णवी तिनसौला ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। वर्तमान में वह गुजरात के एक प्रतिष्ठित विमानन प्रशिक्षण संस्थान में कमर्शियल पायलट प्रशिक्षण के अंतिम चरण में हैं। उम्मीद है कि अगले वर्ष प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वह एक पेशेवर पायलट के रूप में अपने सपनों को नई उड़ान देंगी।
Vaishnavi Tinsola Nears Commercial Pilot Dream, Inspires Young Girls Across Uttarakhand
वैष्णवी तिनसौला शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी, अनुशासित और लक्ष्य के प्रति समर्पित रही हैं। उनके परिवार और शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने हमेशा अपने सपनों को मेहनत और निरंतर प्रयासों के बल पर आगे बढ़ाया। उनकी सफलता के पीछे माता-पिता, दादा-दादी और गुरुजनों का मार्गदर्शन, आशीर्वाद और सतत प्रोत्साहन महत्वपूर्ण रहा है।
एम.एल. पब्लिक स्कूल ने जताया गर्व
गुप्तकाशी स्थित एम.एल. पब्लिक स्कूल परिवार ने वैष्णवी की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। विद्यालय परिवार का मानना है कि वैष्णवी की सफलता क्षेत्र की अन्य छात्राओं के लिए भी प्रेरणा बनेगी। विद्यालय प्रशासन ने कहा कि शिक्षा, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है और वैष्णवी इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
प्रधानाचार्य डॉ. प्रदीप सेमवाल ने दी शुभकामनाएं
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. प्रदीप सेमवाल ने बताया कि वैष्णवी बचपन से ही प्रतिभाशाली और अनुशासित छात्रा रही हैं। उन्होंने जानकारी दी कि तिनसौला परिवार के तीनों बच्चों—नंदिनी तिनसौला, वैष्णवी तिनसौला और उनके छोटे भाई—ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा एम.एल. पब्लिक स्कूल, गुप्तकाशी से प्राप्त की। बाद में परिवार के कर्णप्रयाग स्थानांतरित होने पर उन्होंने अपनी आगे की शिक्षा वहीं पूरी की।
डॉ. सेमवाल ने कहा कि वैष्णवी की सफलता पूरे विद्यालय, केदारघाटी और उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है।
बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा
आज जब पहाड़ की बेटियां शिक्षा, विज्ञान, सेना, खेल और विमानन जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं, तब वैष्णवी तिनसौला की उपलब्धि एक नई प्रेरणा बनकर सामने आई है। सच है... यदि दृढ़ संकल्प, सही मार्गदर्शन और मेहनत हो तो पहाड़ के छोटे गांवों से निकलकर भी देश और दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचा जा सकता है।