नैनीताल: उत्तराखंड हाई कोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने की प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से चर्चाएं जारी हैं। अब तक माना जा रहा था कि गौलापार हाई कोर्ट के नए परिसर के लिए सबसे उपयुक्त स्थान होगा, लेकिन ताजा प्रशासनिक आकलन के बाद रामपुर रोड स्थित बेलबाबा क्षेत्र की संभावनाएं अधिक मजबूत होती नजर आ रही हैं।
Haldwani High Court Shift: Belbaba Emerges as Likely New Site
सूत्रों के अनुसार, बेलबाबा क्षेत्र में वनभूमि और पेड़ों के कटान से जुड़ी बाधाएं अपेक्षाकृत कम हैं, जबकि गौलापार में परियोजना शुरू करने से पहले हजारों पेड़ों की कटाई और वनभूमि हस्तांतरण जैसी जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। हालांकि, हाई कोर्ट के अंतिम स्थान को लेकर अभी राज्य सरकार का आधिकारिक निर्णय आना बाकी है।
गौलापार में कटेंगे 4,238 पेड़ ?
हाई कोर्ट परिसर के लिए पहले गौलापार में लगभग 26 हेक्टेयर वनभूमि चिन्हित की गई थी। इस क्षेत्र में पूर्व प्रस्तावित आईएसबीटी परियोजना की जमीन भी शामिल थी। सीमांकन के दौरान सामने आया कि निर्माण कार्य शुरू करने के लिए शीशम, खैर, नीम, सेमल, बेल और अमलतास सहित 4,238 पेड़ों का कटान करना पड़ेगा। बाद में वनभूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव केंद्रीय हाई इम्पावर्ड समिति द्वारा स्वीकृत नहीं किया गया, जिससे परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।
बेलबाबा में प्रक्रिया हो सकती है आसान
करीब तीन महीने पहले प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने रामपुर रोड स्थित बेलबाबा क्षेत्र का निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध भूमि का आकलन किया। बताया जा रहा है कि यहां पहले ही व्यावसायिक वन प्रबंधन (Commercial Plantation) के तहत बड़ी संख्या में पेड़ों का कटान हो चुका है, जिससे पर्याप्त मैदाननुमा भूमि उपलब्ध है। ऐसे में यहां हाई कोर्ट परिसर का निर्माण अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है। आगे पढ़िए..
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पहले ही काटे जा चुके हैं 41 हजार पेड़
वन विभाग के अनुसार, बेलबाबा क्षेत्र की 121 हेक्टेयर वनभूमि में पूर्व अनुमति के बाद लगभग 41 हजार पेड़ों का कटान कराया गया था। इनमें मुख्य रूप से सागौन और खैर प्रजाति के लगभग 50 वर्ष पुराने पेड़ शामिल थे। इस प्रक्रिया से सरकार को करीब 73.10 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।
64 हेक्टेयर खाली भूमि उपलब्ध
विभागीय जानकारी के अनुसार, बेलबाबा के भाखड़ा रेंज के प्लॉट संख्या 46 और 47 में लगभग 64 हेक्टेयर खाली भूमि उपलब्ध है। यदि इस स्थान को अंतिम रूप दिया जाता है तो वनभूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया रेंज, डिवीजन, सर्किल और राज्य मुख्यालय से होकर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय तक जाएगी। अंतिम मंजूरी केंद्र सरकार से मिलनी होगी। यदि हाई कोर्ट को बेलबाबा में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया जाता है तो गौलापार में वर्षों से लंबित आईएसबीटी परियोजना को दोबारा गति मिलने की संभावना भी बढ़ सकती है। गौरतलब है कि गौलापार में लगभग 75 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित आईएसबीटी परियोजना वर्ष 2017 में बंद हो गई थी। हाल ही में परिवहन विभाग ने नए आईएसबीटी के लिए फिर से विभिन्न स्थानों का सर्वे किया है, जिसमें गौलापार का पुराना स्थल भी शामिल है।
2022 में मिली थी सैद्धांतिक मंजूरी
राज्य गठन के बाद देहरादून को अस्थायी राजधानी और नैनीताल को हाई कोर्ट का मुख्यालय बनाया गया था। नवंबर 2022 में उत्तराखंड कैबिनेट ने हाई कोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद प्रशासन ने कई संभावित स्थलों का निरीक्षण शुरू किया। अब अंतिम फैसला राज्य सरकार और आवश्यक वैधानिक मंजूरियों के बाद ही लिया जाएगा।