उत्तराखंड चमोलीPhoolnarayan Temple Opens for Devotees on Shravan Sankranti

उत्तराखंड: श्रावण संक्रांति पर फ्यूंलानारायण मंदिर के खुले कपाट, यहां महिला पुजारी करती है पुष्प श्रृंगार

चमोली की उर्गम घाटी स्थित प्राचीन फ्यूंलानारायण मंदिर के कपाट श्रावण संक्रांति पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। मंदिर की अनूठी परंपरा के तहत महिला पुजारी ने भगवान का पुष्प श्रृंगार किया।

Phoolnarayan Temple: Phoolnarayan Temple Opens for Devotees on Shravan Sankranti
Image: Phoolnarayan Temple Opens for Devotees on Shravan Sankranti (Source: Social Media)

चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले की उर्गम घाटी में समुद्र तल से लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित प्राचीन फ्यूंलानारायण मंदिर के कपाट गुरुवार को श्रावण संक्रांति के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। वैदिक मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक विधि-विधान के बीच जैसे ही कपाट खुले, पूरा मंदिर परिसर 'जय नारायण' के जयघोष से गूंज उठा। कपाटोद्घाटन के बाद भगवान फ्यूंलानारायण की विशेष पूजा-अर्चना की गई और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर सुख-समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना की।

Phoolnarayan Temple Opens for Devotees on Shravan Sankranti

फ्यूंलानारायण मंदिर की सबसे विशेष परंपराओं में से एक यह है कि भगवान के श्रृंगार का अधिकार केवल महिला पुजारी को प्राप्त है।इस वर्ष आनंदी देवी ने भगवान फ्यूंलानारायण की प्रतिमा का रंग-बिरंगे फूलों से भव्य श्रृंगार किया। कपाट खुलने से लेकर कपाट बंद होने तक भगवान का श्रृंगार केवल फूलों से ही किया जाता है, जो इस मंदिर की विशिष्ट धार्मिक परंपरा मानी जाती है।

श्रावण संक्रांति से नंदा अष्टमी तक खुलते हैं कपाट

मंदिर के कपाट प्रत्येक वर्ष श्रावण संक्रांति के दिन खोले जाते हैं और नंदा अष्टमी के अगले दिन नवमी तिथि को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं। आगे पढ़िए..

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मंदिर में भगवान नारायण चतुर्भुज स्वरूप में विराजमान हैं। उनके साथ माता लक्ष्मी तथा जय-विजय द्वारपाल के रूप में स्थापित हैं। इसके अलावा मंदिर परिसर में क्षेत्रपाल घंटाकर्ण, नंदा-सुनंदा देवियों और वन देवियों की भी विशेष पूजा की जाती है।मंदिर की एक और अनूठी परंपरा बारी व्यवस्था है। इसके तहत भरकी, भेंटा, पिलखी, ग्वाणा और अरोसी गांवों के ग्रामीण हर वर्ष एक परिवार को पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी सौंपते हैं। इस वर्ष आशीष पंवार भगवान नारायण के पुजारी और आनंदी देवी महिला पुजारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

फूलों से सजा मंदिर, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

कपाट खुलने से पहले पूरे मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया। दोपहर करीब एक बजे कपाट खुलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे और भगवान फ्यूंलानारायण से परिवार की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की प्रार्थना की।

धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

कपाटोद्घाटन समारोह में भरकी ग्राम प्रधान चंद्रमोहन सिंह, दुलभ सिंह रावत, लक्ष्मण सिंह नेगी, पंचनाम देवता के पुजारी अब्बल सिंह पंवार, आचार्य मनोहर प्रसाद सेमवाल, रघुवीर सिंह चौहान, लक्ष्मण सिंह पंवार, दीपा देवी सहित आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहे।