देहरादून: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शुक्रवार को उत्तराखंड दौरे पर देहरादून पहुंचे। दोपहर करीब ढाई बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचने के बाद उन्होंने सबसे पहले दिवंगत कांग्रेस नेता अमर मेहता के आवास पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की और परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। इसके बाद उन्होंने एक निजी होटल में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक की। शाम को वह रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां उन्होंने छात्रों और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों से संवाद किया।
Rahul Gandhi Raises Paper Leak Issue in Dehradun
छात्रों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज देश में पेपर लीक का पूरा "मेन्यू कार्ड" तैयार हो चुका है। उनका आरोप था कि जिस तरह किसी रेस्टोरेंट में हर व्यंजन की कीमत तय होती है, उसी तरह विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर भी कथित तौर पर तय रकम देकर हासिल किए जा सकते हैं।
उन्होंने दावा किया कि नीट (NEET) परीक्षा का पेपर करीब 40 लाख रुपये, आईआईटी प्रवेश परीक्षा का पेपर 15 लाख रुपये, उत्तराखंड पटवारी भर्ती का पेपर 15 लाख रुपये, बिहार बेसिक शिक्षक भर्ती परीक्षा का पेपर 10 लाख रुपये और सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का पेपर 25 लाख रुपये में बेचा जाता है। राहुल गांधी ने कहा कि यदि किसी के पास पैसा है तो पेपर लीक माफिया मोबाइल तक प्रश्नपत्र पहुंचा देते हैं, जिससे ईमानदारी से मेहनत करने वाले लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है।
'सरकारी नौकरी ही बची, लेकिन उसमें भी पेपर लीक की समस्या'
राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवाओं के सामने रोजगार के पांच प्रमुख रास्ते होते हैं—विनिर्माण, उद्यमिता, कॉर्पोरेट सेक्टर, निजी क्षेत्र और सरकारी नौकरी। उन्होंने कहा कि आज पहले चार क्षेत्रों में रोजगार के अवसर लगातार कम होते जा रहे हैं और युवाओं के लिए सरकारी नौकरी ही सबसे बड़ा विकल्प बचा है। लेकिन सरकारी भर्ती परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं युवाओं की मेहनत और भविष्य दोनों को नुकसान पहुंचा रही हैं।
परीक्षा प्रणाली में सुधार की उठाई मांग
राहुल गांधी ने कहा कि देश में छात्र-केंद्रित (स्टूडेंट्स सेंट्रिक) परीक्षा प्रणाली लागू की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित हो, परीक्षा प्रक्रिया में रैंडमाइजेशन लागू किया जाए और पूरी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए। आगे पढ़िए..
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उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को किसी भी राजनीतिक दल के प्रभाव से मुक्त रहना चाहिए और कुलपतियों सहित अन्य शैक्षणिक नियुक्तियां निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षाएं कराने की जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए, न कि निजी कंपनियों की। यदि कोई व्यक्ति या गिरोह पेपर लीक में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
रिया थापा के पिता ने सुनाया दर्द, मंच पर हुए भावुक
कार्यक्रम के दौरान नीट परीक्षा से जुड़ी अभ्यर्थी रिया थापा के पिता राजेश गुरुंग ने अपनी बेटी की दर्दनाक कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि परीक्षा देकर लौटने के बाद रिया बेहद खुश थी और उसे पूरा भरोसा था कि उसका पेपर बहुत अच्छा हुआ है। लेकिन जब बाद में पेपर लीक की खबर सामने आई तो वह पूरी तरह टूट गई।
राजेश गुरुंग ने बताया कि उनकी बेटी ने उनसे कहा था, "पापा, हमारे साथ धोखा हुआ है।" इसके बाद वह गहरे मानसिक तनाव में चली गई और अंततः उसने आत्महत्या कर ली। अपनी बेटी को याद करते हुए राजेश गुरुंग मंच पर भावुक हो गए और उनकी आंखों से आँसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ऐसे मामलों में न्याय मिलेगा और भविष्य में किसी अन्य छात्र के साथ ऐसा अन्याय नहीं होगा।
पेपर लीक पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग
राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से जिन छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है, उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक छात्रा ने अपनी जान तक गंवा दी, लेकिन उसके परिवार तक संवेदना व्यक्त करने के लिए कोई आधिकारिक पत्र तक नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों को बेहद गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और प्रभावित छात्रों को हर संभव सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी
अपने संबोधन के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि देश की शिक्षा और भर्ती व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लाखों युवा वर्षों तक मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी उम्मीदों और भविष्य दोनों पर चोट करती हैं। इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए मजबूत और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली विकसित की जाए।