उत्तराखंड देहरादूनDehradun Chit Fund Scam People Duped of Crores

Dehradun Chit Fund Scam: मुनाफे का लालच देकर 100 से ज्यादा लोगों से करोड़ों की ठगी, आरोपी फरार

देहरादून में क्रिप्टो-फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर 100 से अधिक लोगों से करोड़ों की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी लविश चौधरी पर 6-7% मुनाफे का लालच देने का आरोप है।

Dehradun Chit Fund Scam: Dehradun Chit Fund Scam People Duped of Crores
Image: Dehradun Chit Fund Scam People Duped of Crores (Source: Social Media)

देहरादून: राजधानी देहरादून में चिटफंड और ऑनलाइन निवेश के नाम पर एक और बड़ा कथित घोटाला सामने आया है। मुजफ्फरनगर निवासी लविश चौधरी उर्फ नवाब पर छह से सात प्रतिशत तक मुनाफे का लालच देकर 100 से अधिक लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप लगा है। आरोप है कि निवेशकों से रकम लेने के बाद उसने पैसे निकालने की सुविधा बंद कर दी और फरार हो गया।

Dehradun Chit Fund Scam: 100 People Duped of Crores

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने इसकी जांच उत्तराखंड एसटीएफ को सौंप दी है। इससे पहले भी इसी प्रकरण में 25 करोड़ और हाल ही में 12 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़े मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।

क्रिप्टो और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर निवेश का झांसा

न्यायालय में दिए प्रार्थनापत्र में नकरौंदा निवासी कविता परमार ने आरोप लगाया कि लविश चौधरी ने 'बाट ब्रो', 'यार्कर', 'यार्कर कैपिटल', 'बाट अल्फा', 'क्रास मार्केट', 'टीएलसी काइन' और 'माइन क्रिप्टो' समेत कई प्लेटफॉर्म संचालित किए। आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म का इंटरनेट मीडिया, वेबसाइट और ऑनलाइन प्रचार अभियानों के जरिए प्रचार किया गया। लोगों को बताया गया कि यहां क्रिप्टोकरेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग के जरिए निवेश पर हर महीने पांच से छह प्रतिशत तक गारंटीड रिटर्न दिया जाएगा।

वाट्सऐप ग्रुप और बैठकों के जरिए जुटाई रकम

शिकायतकर्ता के अनुसार, करीब तीन साल पहले लविश चौधरी ने अलग-अलग माध्यमों से उनसे और अन्य लोगों से संपर्क किया। आरोप है कि वाट्सऐप ग्रुप, वेबसाइट और प्रचार बैठकों के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया गया। छह से सात प्रतिशत तक मुनाफे का लालच मिलने पर कई लोगों ने बड़ी रकम निवेश कर दी। आरोप है कि शुरुआत में निवेशकों को भरोसा दिलाने के लिए रिटर्न दिया गया, जिसके बाद और अधिक रकम निवेश कराई गई।

अक्टूबर में पैसे निकालने पर लगी रोक

शिकायत के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोगों से रकम इकट्ठा करने के बाद अक्टूबर से पैसे निकालने की सुविधा बंद कर दी गई। इसके बाद निवेशकों को अपना पैसा वापस नहीं मिला और आरोपी से संपर्क भी मुश्किल हो गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि देहरादून क्षेत्र में ही 100 से 120 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और केवल इस मामले में धोखाधड़ी की रकम करीब 8 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

कोर्ट के आदेश पर रायपुर थाने में मुकदमा

कविता परमार ने बताया कि उन्होंने 29 मई को रायपुर थाने में शिकायत दी थी। आरोप है कि शिकायत के बावजूद तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद न्यायालय का रुख किया गया। न्यायालय के आदेश के बाद रायपुर थाना पुलिस ने लविश चौधरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पहले 25 करोड़ और फिर 12 करोड़ की शिकायत

देहरादून में इस कथित निवेश घोटाले को लेकर पहले भी मुकदमा दर्ज हो चुका है। मंगलवार को रायपुर थाना पुलिस ने 12 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का एक और मुकदमा दर्ज किया था। इससे पहले करीब 25 करोड़ रुपये की ठगी से संबंधित मुकदमा भी सामने आ चुका है। जैसे-जैसे नए निवेशक पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने आ रहे हैं, कथित घोटाले की रकम और पीड़ितों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

LUCC घोटाले की तरह बड़े नेटवर्क की आशंका

पुलिस और जांच एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से ले रही हैं। कथित तौर पर ट्रेडिंग, क्रिप्टोकरेंसी और फॉरेक्स के नाम पर लोगों से रकम जुटाने का तरीका इसे बड़े निवेश घोटाले का रूप देता नजर आ रहा है। पुलिस मुख्यालय ने मामले की जांच एसटीएफ उत्तराखंड को सौंप दी है। अब जांच एजेंसी निवेशकों की संख्या, जमा रकम, संबंधित प्लेटफॉर्म, बैंक खातों और पूरे नेटवर्क की पड़ताल करेगी। फिलहाल आरोपी पर लगे आरोपों की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही कथित ठगी की वास्तविक रकम और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।