चमोली: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में दो दिवसीय विधानसभा सत्र शुरू हो गया है। सत्र के बीच क्षेत्रीय जनता, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और राज्य आंदोलनकारियों ने गैरसैंण को जिला बनाने तथा स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग उठाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल कुछ दिनों के विधानसभा सत्र से पहाड़ की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। क्षेत्रवासियों ने सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग करते हुए सरकार से गैरसैंण के विकास के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की है।
Gairsain Assembly Session Begins Amid Local Demands
स्थानीय लोगों और राज्य आंदोलनकारियों का कहना है कि गैरसैंण को लेकर राजनीतिक दलों ने समय-समय पर वादे किए, लेकिन उनकी प्रमुख मांगें अब तक पूरी नहीं हुई हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की कि सरकार गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने और जिला घोषित करने के विषय पर ठोस निर्णय ले। क्षेत्रवासियों का कहना है कि विधानसभा सत्र के आयोजन के साथ-साथ स्थानीय समस्याओं के समाधान पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि पहाड़ी क्षेत्रों के विकास को गति मिल सके।
पूरन सिंह नेगी ने दो दिवसीय सत्र पर उठाए सवाल
भराड़ीसैंण विधानसभा भवन के नजदीकी गांव दिवालीखाल के निवासी पूरन सिंह नेगी ने सत्र के आयोजन पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के आवागमन पर खर्च होता है, लेकिन स्थानीय लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। नेगी ने कहा कि सत्र के दौरान पहाड़ की प्रमुख समस्याओं पर ठोस नीतियां बननी चाहिए। उन्होंने सरकार से गैरसैंण को जिला बनाने की मांग पर भी कार्रवाई करने की अपील की।
सड़क चौड़ीकरण और बेहतर कनेक्टिविटी की मांग
स्थानीय युवा मिंटू भंडारी ने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान भराड़ीसैंण और वीआईपी मार्गों पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जबकि आम लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है। उन्होंने ज्योलीकोट से कर्णप्रयाग तक राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण और गैरसैंण को जोड़ने वाले मुख्य मार्गों की स्थिति सुधारने की मांग की। उनके अनुसार, सड़कों का सुदृढ़ीकरण स्थानीय लोगों और यात्रियों दोनों के लिए जरूरी है।
गैरसैंण में केंद्रीय विद्यालय खोलने की मांग
स्थानीय लोगों ने बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए गैरसैंण में केंद्रीय विद्यालय खोलने की मांग भी उठाई। मिंटू भंडारी का कहना है कि क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुविधा बढ़ने से बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे क्षेत्रों की ओर जाने की जरूरत कम हो सकती है।
अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग
क्षेत्रवासियों ने स्थानीय चिकित्सालय की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी चिंता जताई है। उनकी मांग है कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति की जाए, ताकि गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को इलाज के लिए श्रीनगर, देहरादून, रानीखेत और हल्द्वानी जैसे शहरों तक न जाना पड़े।
सत्र के बीच स्थानीय मुद्दों पर सरकार से उम्मीदें
गैरसैंण में विधानसभा सत्र शुरू होने के साथ ही स्थायी राजधानी, जिला गठन, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दे चर्चा में हैं। स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि सत्र के दौरान पहाड़ की बुनियादी समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।