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Image: Kamalvyuh in delhi ncr

जय उत्तराखंड: गढ़वाली में कमलव्यूह देखकर गौरवान्वित हुए दिल्ली-NCR के लोग..देखिए

दिल्ली-NCR में रहे रहे उत्तराखंड के लोगों ने जब गढ़वाली में कमलव्यूह देखा, तो वास्तव में हैरान रह गए।

अगर आप उत्तरांखड से हैं, तो वास्तव में हर किसी के लिए ये गौरवशाली पल था। दिल्ली से सटे इंदिरापुरम महाकौथिग में जिसने भी कमलव्यूह देखा, वो हैरान था..उसे अपनी संस्कृति, अपनी भाषा, अपनी बोली पर गर्व हो रहा था..कार्यक्रम खत्म होने के बाद दर्शकों ने जय उत्तराखंड के नारे लगाए, तालियों की गड़गड़ाहट से साफ हो गया था कि मंचन कैसा रहा होगा। 23 दिसंबर को ये कार्यक्रम हुआ और जिसने भी देखा, बस तारीफ ही करता रहा। 40 लोगों की एक टीम, जो रुद्रप्रयाग जिले की केदारघाटी से दिल्ली के इंदिरापुरम आई। महाकौथिग जैसे विराट मेले में पहली बार गढ़वाली में कमलव्यूह का आयोजन हो रहा था। ढोल, दमाऊं, भंकुरा, कलाकारों के चेहरे पर तेज और पहाड़ की अनमोल धरोहर को दुनिया के सामने पेश करने का आत्मविश्वास देखते ही बन रहा था।

आचार्य कृष्णानंद नौटियाल के नेतृत्व में केदारघाटी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद (केदारघाटी मंडाण) गुप्तकाशी के कलाकारों को देखकर हर किसी में जोश भर रहा था। धीरे धीरे कमल व्यूह शुरू हुआ। गढ़वाली में ऐसे दमदार डायलॉग, जो आपने आज तक सुने ही ना हों। रोमांच लगातार बढ़ता रहा और कलाकारों ने अपनी अभिनय क्षमता का अद्भुत परिचय दिया। कुछ दृश्य ऐसे थे कि लोगों की आंखें भर आई। आचार्य कृष्णानंद नौटियाल के निर्देशन में केदारघाटी के कलाकारों ने पांडव कालीन इस कमल व्यूह का मंचन कर महाभारत के वृतांत को एक बार फिर जीवित कर दिया। मंचन की शुरुआत महाभारत के युद्द के दृश्य के साथ हुई। इसमें दिखाया गया कि चक्रव्यूह में अभिमन्यु की धोखे से हत्या के बाद अर्जुन ने सूर्यअस्त से पहले जयद्रथ का वध करने की प्रतिज्ञा लेते हैं।

ऐसे में जयद्रथ की सुरक्षा के लिए गुरु द्रोण ने कमल व्यूह की रचना कर दी। युद्ध शुरू होने पर अर्जुन एक द्वार से दूसरे द्वार लड़ते हुए पहुंचते हैं। लेकिन जयद्रथ तक नहीं पहुंच पाते। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण योगमाया की मदद से सूर्य को छिपा देते हैं। ये देख खुश होकर जयद्रथ बाहर निकल आता है लेकिन अचानक सूर्य देव प्रकट हो जाते हैं। इस पर अर्जुन जयद्रथ को मारकर अपने अभिमन्यु की हत्या का बदला लेते हैं। इस आखिरी सीन में तो हर किसी की आंखें भर आईं। धन्य है ऐसे लोगों पर जो उत्तराखंड की संस्कृति, परंपराओं, रीतियों और रिवाजों को सहेजे हुए हैं। खास तौर पर आचार्य कृष्णानन्द नौटियाल और उनकी टीम का दिल से धन्यवाद। इसी का एक वीडियो हम आपको दिखा रहे हैं। देखिए…

दिल्ली एनसीआर के सबसे विराट मेले इंदिरापुरम महाकौथिग में गढ़वाली में कमव्यूह का मंचन किया गया। दर्शकों की भीड़ और जय उत्तराखंड के लगते नारों से साफ से हो गया कि संस्कृति के असली झंडाबरदार ये ही लोग हैं।

आचार्य कृष्णानंद नौटियाल को नमन

Posted by Ruchi Rawat on Sunday, December 23, 2018

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