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Image: Shivajan will meet his family after 13 years

पहाड़ के इस जवान को सलाम, 13 साल पहले बिछड़े बेटे को परिवार से मिलवाया

एसडीआरएफ जवान कुलदीप की बदौलत 22 साल का शिवाजन अपने परिवार से मिलने वाला है, ये किसी चमत्कार जैसा है...

कौन कहता है कि धरती पर भगवान नहीं होते, देवदूत नहीं होते। भगवान के अस्तित्व के होने का अहसास क्या होता है ये उत्तरकाशी के शिवाजन से पूछिए। 13 साल पहले शिवाजन अपने परिवार से दूर हो गया था। जब ये हुआ उस वक्त शिवाजन सिर्फ 12 साल का था, आज उसकी उम्र 22 साल है। वो हर दिन अपने परिवार को याद करता, उनके लिए तड़पता रहता पर बेबस था। फिर आया 21 अगस्त का दिन, ये वो दिन था, जिस दिन उत्तरकाशी में भीषण आपदा आई। इस आपदा में कई लोग अपने परिजनों से बिछड़ गए, पर शिवाजन को इसी आपदा की बदौलत उनका परिवार मिलने वाला है। ऐसा कैसे हुआ, ये भी बताते हैं। आपदा के वक्त शिवाजन को एसडीआरएफ के जवानों ने रेस्क्यू किया था। जवानों ने उससे बात की तो पता चला कि वो 13 साल पहले मजदूरी करने के लिए बिहार से उत्तरकाशी आया था। यहां रहकर वो सेब की पैकिंग का काम करने लगा। एक दिन मजदूरों का मालिक से झगड़ा हो गया और दूसरे सभी मजदूर शिवाजन को अकेला छोड़कर गांव से चले गए। तब से वो यहीं है, उसे अपने परिवार के बारे में कुछ नहीं पता। हां इतना जरूर याद है कि उसके गांव के पास बड़े-बड़े जहाज उड़ा करते थे। एसडीआरएफ जवान कुलदीप सिंह से शिवाजन का ये दर्द देखा नहीं गया। शिवाजन को सिर्फ इतना याद था कि वो भड़ेजी गांव का रहने वाला है। परिवार का कुछ पता नहीं था। पर जवान कुलदीप सिंह शिवाजन को उसके परिवार से मिलाने की ठान चुके थे। उन्होंने इंटरनेट मैप पर शिवाजन का गांव खोजा। गया जिले के पास गांव मिल भी गया।

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बाद में जवान कुलदीप ने गांव के नजदीकी थाने से संपर्क किया, पर पुलिस ने मामले से पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद कुलदीप ने एसपी सिटी को कॉल कर घटना की जानकारी दी। जवान की कोशिशें रंग लाईं और वो शिवाजन के परिवार वालों से संपर्क करने में सफल रहे। एसडीआरएफ के जवान ने शिवाजन की उसके परिवारवालों से बात भी कराई। परिवारवालों से बात कर शिवाजन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसका 13 साल का वनवास अब जल्द खत्म होने वाला है। जल्द ही शिवाजन की मां फूला देवी अपने बेटे से मिलने के लिए देहरादून आने वाली हैं। शिवाजन एसडीआरएफ और उत्तराखंड पुलिस को दुआएं दे रहा है। शिवाजन का 13 साल बाद अपने परिवार से मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है और ये चमत्कार हुआ एसडीआरएफ जवान कुलदीप की कोशिशों की बदौलत, कुलदीप चाहते तो गरीब शिवाजन को टरका सकते थे, जैसा कि हममें से ज्यादातर लोग करते हैं, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया। शिवाजन की मदद की कोशिश की और उनके प्रयासों की बदौलत शिवाजन को अपना बिछड़ा परिवार मिल गया। कुलदीप जैसे लोगों की बदौलत ही दुनिया में इंसानियत जिंदा है, यही लोग हमारी दुनिया को, हमारी जिंदगी को असली मायने देते हैं।

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