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Image: Bhilwara model centre wants other cities to learn

उत्तराखंड समेत कई राज्यों में लागू हो सकता है ‘भीलवाड़ा’ मॉडल, कोरोना को दे चुका है मात

उत्तराखंड समेत पूरे देश में भीलवाड़ा मॉडल (Bhilwara model) को अपनाया जा सकता है। केंद्रीय कैबिनेट सचिव ने इस मॉडल को देशभर में लागू करने के संकेत दिए हैं। जानिए क्या है भीलवाड़ा मॉडल

उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण तेजी से पैर पसार रहा है। हर दिन कोरोना के नए पॉजिटिव केस सामने आ रहे हैं। सोमवार को देहरादून में 4 पॉजिटिव आने के साथ ही राज्य में कोरोना पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा 31 हो गया। देहरादून कोरोना संक्रमण की दूसरी स्टेज में पहुंच गया है, और अगर हम अब भी नहीं चेते तो कोरोना संक्रमण को कम्युनिटी लेवल तक पहुंचने में भी देर नहीं लगेगी। कोरोना के बढ़ते केसेज के बीच हर राज्य में राजस्थान के भीलवाड़ा मॉडल (Bhilwara model) को अपनाने की बात हो रही है। भारत सरकार ने राजस्थान सरकार के भीलवाड़ा मॉडल को काफी सराहा है और ब्योरा मांगा है कि किस तरह से भीलवाड़ा में कोरोना पॉजिटिव लोगों का इलाज किया गया।मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने राजस्थान के सीएम सीएम के साथ समीक्षा बैठक में इसकी जानकारी दी। कैबिनेट सचिव गौबा ने कोरोना से बचाव के लिए भीलवाड़ा में किए गए उपायों की तारीफ करते हुए इस मॉडल को देशभर में लागू करने के संकेत दिए हैं। अब सवाल ये है कि आखिर भीलवाड़ा मॉडल क्या है? इसे समझने की कोशिश कीजिए। इस भयानक महामारी के बीच भीलवाड़ा जिले ने कोरोना वायरस को जिस तरह मात दी, वो वाकई काबिले तारीफ है। पिछले महीने भीलवाड़ा जिला कोरोना का हॉटस्पॉट बनकर उभरा था। यहां कोरोना के एक के बाद एक कई केस आए, लग रहा था हालात काबू में नहीं आएंगे, लेकिन राजस्थान सरकार ने तेजी से काम करते हुए भीलवाड़ा में कोरोना के आंकड़ों को 27 पर ही रोक दिया। आगे जानिए ये कैसे संभव हुआ

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यहां एक निजी अस्पताल के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। जिसके बाद पूरे शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया। बॉर्डर सील किए गए। 16 हजार स्वास्थ्यकर्मियों की टीम भीलवाड़ा भेजी गई। जिसने कर्फ्यू के दौरान घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की। 10 दिन के भीतर 18 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई। जितने लोग सर्दी-जुकाम से पीड़ित मिले, उन्हें घरों से निकालकर क्वारेंटाइन किया गया। भीलवाड़ा के सभी फाइव स्टार और थ्री स्टार होटल, रिजॉर्ट और प्राइवेट अस्पतालों का सरकार ने अधिग्रहण किया और यहां पर कोरोना के लक्षण पाए गए लोगों को क्वारेंटाइन किया। कभी भीलवाड़ा 26 संक्रमितों और दो मरीजों की मौत के साथ राज्य का सबसे अधिक कोरोना प्रभावित जिला था, लेकिन यहां 30 मार्च से एक भी कोविड-19 का नया मामला सामने नहीं आया है।

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भीलवाड़ा में 27 लोगों में से अब सिर्फ 7 लोग कोरोना पॉजिटिव बचे हैं बाकी 20 लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं। उत्तराखंड में जिस तेजी से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए यहां पर भी भीलवाड़ा मॉडल को लागू करने की जरूरत महसूस हो रही है। भीलवाड़ा में कोरोना की रोकथाम में प्रशासन, मेडिकल टीम और पुलिस के साथ-साथ जनता का भी विशेष योगदान रहा। लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया। उत्तराखंड में भी अगर लोग जागरूक रहें तो कोरोना को हराना इतना मुश्किल भी नहीं है। संक्रमण को रोकने का सबसे कारगर तरीका यही है कि जिन इलाकों में मामले सामने आए उन्हें वहीं रोक दिया जाए, ताकि वो आगे कम्युनिटी में वायरस ना फैलाएं। कुल मिलाकर कोरोना से जंग के लिए भीलवाड़ा मॉडल (Bhilwara model) एक सही उपाय साबित हो सकता है।

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