Thank You Dehradun...देहरादून के नाम IPS अरुण मोहन जोशी की भावुक चिट्ठी पढ़िए (IPS Arun Mohan Joshi letter to Dehradun)
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Image: IPS Arun Mohan Joshi letter to Dehradun

Thank You Dehradun...देहरादून के नाम IPS अरुण मोहन जोशी की भावुक चिट्ठी पढ़िए

मित्र पुलिस के मानवीय चेहरे से रूबरू होने के बाद लोग अब खाकी को अपना सच्चा हमदर्द समझने लगे हैं। लोगों की सोच में आए इस बदलाव का श्रेय डीआईजी अरुण मोहन जोशी को जाता है।

पुलिस के प्रति आम लोगों की सोच से हम सब वाकिफ हैं, लेकिन उत्तराखंड पुलिस में कुछ अफसर ऐसे भी हैं, जिन्होंने पुलिस की नकारात्मक छवि को बदलने का काम किया है। देहरादून के एसएसपी रहे अरुण मोहन जोशी ऐसे ही काबिल युवा अफसरों में से एक रहे हैं। कोरोना काल में अग्रिम पंक्ति में खड़ी मित्र पुलिस के मानवीय चेहरे से रूबरू होने के बाद लोग अब खाकी को अपना सच्चा हमदर्द समझने लगे हैं। लोगों की सोच में आए इस बदलाव का श्रेय डीआईजी अरुण मोहन जोशी को जाता है, जो मुश्किल भरे दौर में योद्धा के तौर पर उभरे और पुलिस महकमे को मानवता का पाठ पढ़ाया। आईपीएस अरुण मोहन जोशी देहरादून के सबसे युवा एसएसपी रहे हैं, उन्हें अब तक का सबसे सफल कप्तान माना जा रहा है। पिछले दिनों पुलिस महकमे में हुए फेरबदल के बाद 18 दिसंबर को अन्य पुलिस अफसरों के साथ डीआईजी अरुण मोहन जोशी का भी तबादला कर दिया गया। उनके तबादले की खबर से दूनवासियों का दिल तो टूटा ही, आईपीएस अरुण मोहन जोशी भी बेहद भावुक हो गए। अब उन्हें डीआईजी विजिलेंस, पीएससी और एटीसी बनाया गया है। अपने तबादले के अगले ही दिन यानि 19 तारीख को उन्होंने देहरादून की जनता के नाम एक भावुक चिट्ठी लिखी थी, जो कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। उन्होंने पत्र के माध्यम से दूनवासियों के लिए अपनी भावनाएं जाहिर की हैं। चलिए अब आपको पूर्व एसएसपी अरुण मोहन जोशी का लिखा लेटर पढ़ाते हैं, जिसमें उन्होंने दूनवासियों के लिए अपने प्रेम का इजहार करने के साथ ही एक भावुक अपील भी की है।

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"नमस्ते देहरादून
यह मेरे लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं रहा कि देहरादून जो कि मेरा घर, मेरा Home Town है वहां मुझे DIG/SSP देहरादून के रूप में काम करने का मौका मिला। मेरे वरिष्ठ अधिकारियों, सरकार व मुख्यमंत्री जी का विशेष स्नेह मुझे मिला, जिसके लिए मैं उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। गृह सचिव नितेश झा सर का भी इस मौके पर जिक्र करना बेहद जरूरी है। झा सर ने मुझ पर विश्वास जताते हुए आशंकाओं को खारिज करते हुए राजधानी पुलिस की कमान सौंपी।
मुझे याद है पिछले वर्ष 3 अगस्त को मुझे राजधानी के एसएसपी बनने की बेहद खुशी प्राप्त हुई। दूसरी ओर मेरे मन में एक चिंता यह भी थी कि दून जिला मेरा घर है, जहां मेरे तमाम परिचित, रिश्तेदार, मित्र हैं। कहीं कोई ऐसी स्थिति न बनने पाए जिससे मैं कमजोर हो जाऊं या काम पर कोई विपरीत असर पड़े।
मेरा जीवन में हमेशा प्रयास रहा कि किसी डर, लालच या घबराहट में ऐसा कोई काम न करूं जिसका बोझ मेरे मन में हमेशा रह जाए। यहां कार्यभार ग्रहण करने से पहले ईश्वर से यह प्रार्थना थी कि वह मुझे इतनी शक्ति प्रदान करे कि मैं किसी भी स्थिति में कमजोर न पड़ूं। पिछले 16 माह के कार्यकाल के दौरान मेरे द्वारा जो भी कार्य किए गए मेरा प्रयास रहा कि व्यक्तिगत पसन्द-नापसन्द को दूर रखते हुए बिना किसी भेदभाव, भय अथवा लालच के काम करूं। इस दौरान हमारे काम को कई लोगों द्वारा सराहा गया व कुछ लोगों द्वारा आलोचनाएं भी की गईं। फिर भी इस दौरान मुझसे जो भी गलतियां हुईं मुझे पूरी उम्मीद है कि इसके लिए आप सब भी मुझे माफ करेंगे।
जिन्होंने हमारे काम को सराहा उनका दिल से आभार व्यक्त करता हूं। जिन्होंने हमारे काम की आलोचना की उनका भी मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। आलोचनाओं से हमें अपनी कमियों को समझने और उसे सुधारने का मौका मिलता है।
देहरादून में घटित होने वाली किसी भी आपराधिक घटना को हमने अपनी व्यक्तिगत विफलता समझा और प्रत्येक घटना की जांच करते हुए पुलिसिंग को और बेहतर बनाने और उसमें सुधार करने का प्रयास किया।
देहरादून में मेरे साथ कार्यरत रहे सभी अधिकारियों व कर्मचारियों का दिल से आभार, जिन्होंने लगन मेहनत एवं कर्तव्य निष्ठा के साथ जुनून से काम करते हुए दून पुलिस को अव्वल बना दिया। इसमें समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन भी अहम रहा है।
मुझे आपसे ये जानकारी साझा करने में और भी खुशी महसूस हो रही है कि राजधानी में कोई भी बड़ा अपराध मौजूदा समय में अनसुलझा नहीं रह गया है। घटनाओं के खुलासे में देहरादून की पुलिस देश के किसी भी जनपद की पुलिस से बहुत आगे रही है।
कोरोना काल में लॉकडाउन की अवधि में देहरादून सम्भवतः देश का अकेला जनपद था, जिसमें गरीब व असहाय लोगों को राशन/भोजन वितरित करने की जिम्मेदारी पुलिस को सौंपी गई। इस दौरान देहरादून पुलिस द्वारा जिस व्यवस्थित तरीके से गरीब एवं असहाय लोगों को राशन एवं भोजन वितरण करने का काम किया गया उसे एक मॉडल के रूप में पहचान मिली और आमजन मानस के बीच पुलिस की विश्वसनीयता बढ़ी। जनता के सहयोग से तथा बिना किसी सरकारी बजट अथवा वित्तीय संसाधन के देहरादून पुलिस ने लॉकडाउन में प्रतिदिन दस हजार से ज्यादा लोगों को भोजन/राशन उपलब्ध कराया। हमने यह सुनिश्चित किया था कि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे।
यातायात के क्षेत्र में सुधार की प्रक्रिया गतिमान है। कई कार्ययोजनाओं पर कार्य किए जा रहे थे परन्तु आकस्मिक कारोना महामारी के चलते उक्त कार्यों को स्थगित करना पड़ा। मुझे उम्मीद है कि कोरोना काल की समाप्ति के पश्चात देहरादून पुलिस यातायात के क्षेत्र में अधूरे रह गये कार्यों को पूरा करेगी और बेहतरीन यातायात प्रबंधन का सटीक मॉडल तैयार करेगी।
युवाओं को नशे से बचाने के लिए हमारी टीम ने हर संभव प्रयास किए। मुझे उम्मीद है कि जब तक इस समस्या को जड़ से समाप्त नहीं कर देंगे हमारा प्रयास इसी प्रकार जारी रहेगा। स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में राजधानी में तीसरी आंख का दायरा और बढ़ाते हुए हालिया दिनों में 500 कैमरे लगवाए गए हैं।
आप सभी का बहुत स्नेह और प्यार मिला, इसके लिए मैं आप सभी का दिल से आभार व्यक्त करता हूं।
Thank you Dehradun!!
अरुण मोहन जोशी"

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