देवभूमि के इस मंदिर से आप कभी खाली हाथ नहीं जा सकते, मां कुछ जरूर देंगी ! (Story of mata surkanda devi temple uttarakhand tehri garhwal)
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Image: Story of mata surkanda devi temple uttarakhand tehri garhwal

देवभूमि के इस मंदिर से आप कभी खाली हाथ नहीं जा सकते, मां कुछ जरूर देंगी !

कहा जाता है कि जीवन में एक बार सुरकंडा देवी के दर्शन काफी ज्यादा जरूरी हैं। ऐसा क्यों कहा जाता है, ये भी जान लीजिए।

कहा जाता है कि देवभूमि में जन्म लेने वाला ही जन्मजन्मांतर के पापों से मुक्त हो जाता है। आज हम आपको इसी देवभूमि के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में मान्यता कि यहां सिर्फ एक बार दर्शन कर लेने से ही सातजन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है। हम बात कर रहे हैं सुरकंडा देवी मंदिर की। प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां सुरकंडा का मंदिर टिहरी जनपद में जौनुपर पट्टी के सुरकुट पर्वत पर स्थित हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार यहां सती का सिर गिरा था। कहानी कुछ इस तरह है कि जब राजा दक्ष ने कनखल में यज्ञ का आयोजन किया तो उसमें भगवान शिव को नहीं बुलाया। लेकिन, शिवजी के मना करने पर भी सती यज्ञ में पहुंच गई। वहां दूसरे देवताओं की तरह सती का सम्मान नही किया गया। यहां तक कि भगवान शिव का भी अपमान किया गया।

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पति का अपमान और खुद की उपेक्षा से क्रोधित होकर सती यज्ञ कुंड में कूद गई। खबर भगवान शिव तक पहुंची तो वो रौद्र रूप में आ गए। शिव सती का शव त्रिशूल में टांगकर आकाश भ्रमण करने लगे। इसी दौरान सती का सिर सुरकुट पर्वत पर गिरा। तभी से ये स्थान सुरकंडा देवी सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ। इसका उल्लेख केदारखंड व स्कंद पुराण में मिलता है। कहा जाता है कि देवताओं को हराकर राक्षसों ने स्वर्ग पर कब्जा कर लिया था। ऐसे में देवताओं ने माता सुरकंडा देवी के मंदिर में जाकर प्रार्थना की कि उन्हें उनका राज्य मिल जाए। राजा इंद्र ने यहां मां की आराधना की थी। उनकी मनोकामना पूरी हुई और देवताओं ने राक्षसों को युद्घ में हराकर स्वर्ग पर अपना आधिपत्य स्‍थापित किया। इसलिए इस जगह को मनोकामना सिद्धि का मंदिर कहा जाता है।

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सुरकंडा मंदिर में गंगा दशहरा के मौके पर देवी के दर्शनों का विशेष महात्म्य है। माना जाता है कि इस समय जो देवी के दर्शन करेगा, उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। यह जगह बहुत रमणीक है। खास बात ये है कि मां अपने दरबार से किसी को खाली हाथ नहीं जाने देती। अब आपको यहां के नजारों के बारे में भी बता देते हैं। आप सुरकंडा मां के दरबार में खड़े हो जाइए, यहां से बदरीनाथ केदारनाथ, तुंगनाथ, चौखंबा, गौरीशंकर, नीलकंठ आदि सहित कई पर्वत श्रृखलाएं दिखाई देती हैं। मां सुरकंडा देवी के कपाट साल भर खुले रहते हैं। सर्दियों में अधिकांश समय यहां पर बर्फ गिरी रहती है। मार्च और अप्रैल में भी मौसम ठंडा ही रहता है। मई से अगस्त तक अच्छा मौसम रहता है। इसके साथ ही मंदिर प्रांगण में यात्रियों के ठहरने के लिए धर्मशालाओं की सुविधा है।

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