गढ़वाल: पहली बार महिला अफसर को मिला बॉर्डर रोड का जिम्मा, मेजर आइना राणा को बधाई (Major aaina rana to monitor border road work in chamoli)
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Image: Major aaina rana to monitor border road work in chamoli

गढ़वाल: पहली बार महिला अफसर को मिला बॉर्डर रोड का जिम्मा, मेजर आइना राणा को बधाई

मेजर आइना राणा को बधाई, भारत-चीन सीमा पर संभालेंगी बॉर्डर रोड की जिम्मेदारी, पहली बार किसी महिला अफसर को मिली यह अहम जिम्मेदारी, आप भी दें बधाई-

बीआरओ यानी कि सीमा सड़क संगठन हमेशा से दुर्गम इलाकों में कीर्तिमान स्थापित करता आ रहा है। बीआरओ दुर्गम से दुर्गम इलाकों के साथ ही सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण जगहों पर भी काम करता है। बीआरओ के अंदर भारत-चीन बॉर्डर पर तैनात इलाकों में काम कर रहे लगभग सभी अफसर पुरुष ही हैं। मगर बीआरओ ने आखिरकार भारत-चीन सीमा पर सेना की पहुंच आसान बनाने के लिए एक शानदार निर्णय लिया है और एक महिला अफसर के कंधे पर इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। जी हां, अब बदरीनाथ धाम के पास माणा दर्रे की सबसे ऊंचाई वाली निर्माणाधीन सड़कों की जिम्मेदारी पहली बार महिला अधिकारी मेजर आइना राणा को सौंपी गई है। निर्जन और दुर्गम इलाके होने के कारण आज तक कभी किसी महिला अधिकारी की बॉर्डर रोड पर तैनाती नहीं हुई। बीआरओ ने ये बड़ी जिम्मेदारी पहली बार किसी महिला अधिकारी को दी है। दरअसल बीआरओ चमोली जिले के सीमांत क्षेत्र नीती और माणा पास को चीन सीमा तक सड़क से जोड़ने का कार्य कर रहा है। यह क्षेत्र बेहद निर्जन और दुर्गम है जिस कारण आज तक कभी किसी महिला अधिकारी की यहां तैनाती नहीं हुई। मगर अब बदरीनाथ धाम के पास माणा दर्रे की सबसे ऊंचाई वाली निर्माणाधीन सड़कों में से एक की जिम्मेदारी पहली बार महिला अधिकारी मेजर आइना राणा को सौंपी गई है। वह बीआरओ की 75 सड़क निर्माण कंपनी (आरसीसी) की कमान संभाल रही हैं।

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बीआरओ का यह ऐतिहासिक निर्णय उस रूढ़िवादी सोच को भी नष्ट करता है जो कि समाज में वर्षों से चली आ रही है। आखिर महिलाओं को केवल सरल कार्यों में ही क्यों चुना जाता है। क्या वे मुश्किल कार्य करने के लिए सक्षम नहीं हैं? यह एक बड़ा मिथक है जो कि अब समाज में टूटता हुआ नजर आ रहा है और महिलाओं को भी भारतीय सेना के जरिए दुर्गम इलाकों में ड्यूटी करने के लिए भेजा जा रहा है जो कि गर्व की बात है। मेजर आइना राणा मूलरूप से हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की रहने वाली हैं। आइना के पिता संजीव कुमार रेलवे से सेवानिवृत्त हैं। उनकी मां कविता गृहिणी हैं। मेजर आइना बताती हैं कि बचपन से ही मैं सेना में जाना चाहती थी और देश की सेवा करना चाहती थी जिस वजह से उन्होंने अपने स्कूल के दिनों में ही एनसीसी ज्वाइन कर ली और एनसीसी के जरिए सेना में जाने की उनकी राह आसान हो गई..उन्होंने एसएमडीआरएसडी कॉलेज पठानकोट से कंप्यूटर साइंस में स्नातक किया है। आइना राणा का कहना है कि उनको खुशी है कि बीआरओ ने उनके कंधे पर यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है।

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