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Image: DEHRADUN DRIVING LICENCE NEWS

देहरादून वालों के लिए जरूरी खबर, अब ऐसे बनेगा ड्राइविंग लाइसेंस..40 फीसदी ड्राइवर फेल

दून में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले दलालों के धंधे पर हैम्स एप ने शिकंजा कस दिया है...जानें ड्राइविंग टेस्ट से जुड़ी जरूरी बातें

वो दिन लद गए जब ड्राइविंग लाइसेंस के लिए दलाल को सेट कर, लाइसेंस हासिल कर लिया जाता था। दलाल हेर-फेर कर जुगाड़ बैठा ही लिया करते थे। इधर हाथ में रुपये आए और उधर ड्राइविंग लाइसेंस हाजिर...अब ऐसा नहीं चलेगा। जिन लोगों को गाड़ी चलानी नहीं आती, वो लाख जुगाड़ बैठा लें, लाइसेंस नहीं मिलेगा। जिन्हें ड्राइविंग आती भी है वो भी आसानी से लाइसेंस हासिल नहीं कर पाएंगे। क्योंकि अब लाइसेंस हासिल करने के लिए दलाल को नहीं हार्नेशिंग ऑटो मोबाइल सेफ्टी एप यानि (हैम्स) को खुश करना पड़ेगा। हैम्स ने आवेदक को पास किया, तभी लाइसेंस मिलेगा। परिवहन विभाग अब लाइसेंस जारी करने के लिए अत्याधुनिक सेंसर से लैस मशीनों से ड्राइविंग टेस्ट ले रहा है। आवेदक को गाड़ी चलानी आती है या नहीं, इसके लिए हैम्स की भी मदद ली जा रही है। ये एक खास तरह का एप है। जिसके जरिए आवेदक के ड्राइविंग टेस्ट की रिकॉर्डिंग भी की जाती है। अगर आवेदक ये रिकॉर्डिंग देखना चाहें तो उन्हें निर्धारित फीस देकर रिकॉर्डिंग दे दी जाती है। आगे जानिए हैम्स के बारे में सब कुछ।

यह भी पढें - देहरादून में अब आसान नहीं होगा ड्राइविंग लाइसेंस बनाना, सेंसर तय करेगा सारी बात
परिवहन विभाग के सख्त नियमों की वजह से ड्राइविंग टेस्ट देने आए 40 प्रतिशत से ज्यादा आवेदक टेस्ट में पास नहीं हो पाते। लाइसेंस बनाते वक्त जांच में कोई कमी ना रह जाए, इसके लिए परिवहन विभाग के अधिकारी मोबाइल एप हार्नेशिंग ऑटो मोबाइल सेफ्टी (हैम्स) के जरिए जांच कर रहे हैं। किसी को भी धोखा दिया जा सकता है, पर हैम्स को धोखा दे पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। ये ऐप क्या करता है ये जानना भी जरूरी है। हैम्स अधिकारियों को ये बताता है कि गाड़ी ड्राइव करने वाला सही तरीके से गाड़ी चला रहा है या नहीं। उसने नियमों का पालन किया या नहीं। गाड़ी चलाते वक्त सीट बेल्ट लगी थी या नहीं ये जानकारी भी एप देता है। यही नहीं टेस्ट के वक्त हैम्स की नजर हर वक्त चालक की नजरों पर रहती है। हेम्स एप में कई खास बातें हैं। ड्राइविंग टेस्ट के वक्त हेम्स एप को मोबाइल में ऑन कर सीट पर आगे लगा दिया जाता है। इसके बाद सारा काम मोबाइल का कैमरा करता है। ये ड्राइवर की हर एक्टिविटी को कैद करता है। दून में परिवहन विभाग के अधिकारी हेम्स एप के जरिए ड्राइविंग टेस्ट की बकायदा रिकॉर्डिंग भी करते हैं। ये रिकॉर्डिंग उन आवेदकों को दे दी जाती है, जो टेस्ट के नतीजों पर सवाल उठाते हैं। जब से ये टेस्ट शुरू हुआ है, तब से हर दिन औसतन 40 फीसदी चालक टेस्ट में फेल हो जाते हैं। इसीलिए अगली बार आप जब भी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने जाएं, तो पूरी तैयारी के साथ जाएं। साथ ही नियमों का पालन भी जरूर करें।

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