टॉम ऑल्टर: पहाड़ में जन्म लेने वाला वो बेमिसाल शख्स, जिसने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया (Tom Alter Biography)
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Image: Tom Alter Biography

टॉम ऑल्टर: पहाड़ में जन्म लेने वाला वो बेमिसाल शख्स, जिसने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया

शेरों-शायरी और चाय की हर चुस्की से मोहब्बत करने वाले इंसान थे। ये लेख एक कोशिश है, आज उनके जन्मदिन पर उनसे एक और मुलाक़ात करने की....

जिन्हें नहीं पता उन्हें बता दें, टॉम ऑल्टर सिर्फ़ दिखने के फ़िरंगी थे, उनका दिल और ज़ुबान पूरी तरह भारतीय थी।
कभी वक़्त मिले तो यूट्यूब पर टॉम ऑल्टर और उनकी ज़ुबान से मुख़ातिब हो जाईये, तब आप पाएंगे इस इंसान की हिन्दी पर ही नहीं बल्कि उर्दू पर भी पकड़ बहुत मजबूत थी। शायद हम से और कुछ लोगों से ज़्यादा।
एक कलाकार होने से पहले वह क्रिकेट के शौक़ीन थे, और उनका यह शौक़ सिर्फ़ देखने तक सीमित नहीं था। जब उन्हें वक़्त मिलता वो क्रिकेट खेला करते थे, सचिन तेंदुलकर का पहला वीडियो इंटरव्यू लेने वाले भी टॉम ऑल्टर ही थे। ये बात 19 जनवरी 1989 की है जब सचिन मात्र 15 साल के थे।
टॉम ऑल्टर का जन्म 22 जून 1950 को मसूरी में हुआ था। टॉम की स्कूलिंग मसूरी के वुड्सटॉक स्कूल से हुई थी। इनका 1954 से 1968 तक का समय राजपुर और मसूरी में बीता था। टॉम ने एक बार बताया कि जब वह 8-9 साल के थे, तब उन्होंने अपने पिता से राजपुर को लेकर एक सवाल पूछा - ‘इस जगह पर इतने मंदिर और आश्रम क्यों हैं और आपने भी मसीह ध्यान केंद्र आकर यहीं क्यों खोल दिया?'
पिता ने बेटे टॉम को बताया - ‘ये हिस्सा बहुत पवित्र है। एक तरफ़ 25 मील दूर गंगा बहती है और दूसरी तरफ़ 25 मील यमुना बहती है। राजपुर दो महान नदियों के बिलकुल बीचों-बीच है, इसीलिए ये जगह पवित्र है।'

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टॉम कॉलेज की पढ़ाई के लिए अमेरिका की येल यूनीवर्सिटी गए थे लेकिन एक साल में वापस भारत आ गए। भारत आने के बाद उन्होंने हरियाणा के जगाधरी में सेंट थॉमस स्कूल में बतौर अध्यापक नौकरी की। इस वक़्त टॉम 19 साल के थे। इसके बाद उन्होंने कुछ दिन वुडस्टॉक स्कूल में भी काम किया। फिर वापस अमेरिका गए और वहां अस्पताल में काम करने लगे। फिर चाचा ने बुला लिया। ढाई साल तक ऐसे ही नौकरियां करी।
टॉम ने सन 1970 में जगाधरी में राजेश खन्ना की फ़िल्म ‘आराधना’ देख ली। फ़िल्म बहुत अच्छी लग गई। फिर क्या था ! उसी वक़्त एक्टर बनने का ख़याल दिमाग में बैठ गया। उन्होनें दो साल बाद भारतीय फ़िल्म और टेलिविज़न संस्थान यानि FTII पुणे में दाखिला ले लिया। साल 1972 से लेकर 1974 तक वहीं रहे। यहाँ रोशन तनेजा टॉम के गुरु थे। टॉम कहते थे-- ‘मैं इस एक्टिंग इन्स्टीट्यूट न जाता तो आज मुझे कोई न जानता।’ यहां नसीरुद्दीन शाह और ओम पुरी इनके जूनियर थे। FTII में दो साल तक क्रिकेट कैप्टन भी रहे। नसीर भी इनके साथ खूब क्रिकेट खेलते थे। साल 1979 में नसीर के साथ मिलकर टॉम ने मोटली थियेटर ग्रुप भी खोला। आगे चलकर टॉम FTII में एक्टिंग के HOD भी रहे।
टॉम ऑल्टर ने अपने फ़िल्मी सफ़र में 300 से ज़्यादा फ़िल्मों में काम किया था। उन्होंने बंगाली, आसामी, गुजराती, तेलुगू और तमिल भाषा की फ़िल्मों में भी काम किया। टॉम ऑल्टर ने अपने फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत साल 1976 में आई रामानंद सागर की फ़िल्म चरस से की थी। इस दौरान टॉम नियमित रूप से थिएटर भी करते रहे।
सन 2008 में टॉम ऑल्टर पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित हुए।
एक उम्दा इंसान और बेहतरीन कलाकार टॉम आल्टर का 29 सितंबर 2017 को 67 साल की उम्र में स्किन कैंसर के चलते मुंबई में इंतक़ाल हो गया।
टॉम आल्टर अपनी कला के ज़रिये सदियों तक हमारे आपके बीच जिंदा रहेंगे।

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