गढ़वाल: कमीशन के मीट-भात में स्वाहा हो गई सड़क, बनने से पहले ही उखड़ गई (Devikhet-Chailusain road of poor quality)
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Image: Devikhet-Chailusain road of poor quality

गढ़वाल: कमीशन के मीट-भात में स्वाहा हो गई सड़क, बनने से पहले ही उखड़ गई

देवीखेत-चैलूसैंण मोटर मार्ग से बमोली तक 4.52 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जानी है। रोड निर्माण के लिए केंद्र ने साढ़े चार करोड़ रुपये दिए हैं, लेकिन सड़क का हाल आप खुद देख लीजिए।

पहाड़ में विकास के नाम पर बन रही सड़कों का बुरा हाल है। कमीशनखोरी के खेल में अक्सर गुणवत्ता की अनदेखी कर दी जाती है, नतीजतन सड़कें बनने से पहले ही उखड़ने लगती हैं। कोटद्वार के यमकेश्वर क्षेत्र में भी यही हो रहा है। यहां द्वारीखाल में देवीखेत-चैलूसैंण से बमोली मोटर मार्ग तक दूसरे चरण का निर्माण कार्य चल रहा है। जिसके तहत सड़क पर डामर बिछाया जा रहा है, लेकिन हाल ये है कि सड़क के पूरी तरह बनने से पहले ही ये डामर उखड़ने लगा है। लोग गुस्साए हुए हैं, निर्माण कार्य में धांधली का आरोप लगा रहे हैं। ग्रामीणों ने सड़क के कटान को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। चलिए पूरा मामला बताते हैं। द्वारीखाल में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत देवीखेत-चैलूसैंण मोटर मार्ग से 5 किमी बमोली तक 4.52 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जानी है। रोड निर्माण के लिए केंद्र ने साढ़े चार करोड़ रुपये दिए हैं। दो साल पहले यह धनराशि एनपीसीसी एजेंसी को ट्रांसफर कर दी गई। इसी के साथ एजेंसी ने रोड का कटान शुरू कर दिया। आगे पढ़िए

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अब गांव वालों का कहना है कि एजेंसी ने सर्वे के अनुसार रोड काटने के बजाय मनमर्जी से सड़क का कटान कराया। नतीजतन बंदाखड़ी, पुंडोली, पच्छी और क्षेत्रपाल जैसे गांवों का बड़ा नुकसान हो गया। सड़क इन गांवों में रहने वाले लोगों के घर के करीब से गुजरनी थी, लेकिन अब इन्हें सड़क तक पहुंचने के लिए आधा किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। सड़क कटान के दौरान जो मलबा गिरा, उससे ग्रामीणों की कई हेक्टेयर भूमि बर्बाद हो गई। अब रोड पर घटिया डामर बिछाया जा रहा है, जिसमें गहरी दरारें साफ देखी जा सकती हैं। रोड बनने के साथ ही उखड़ने लगी है। ग्रामीण इस बारे में अधिकारियों से शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन कोई सुन नहीं रहा। वहीं एनपीसीसी के अधिकारी कह रहे हैं कि ग्रामीणों ने शुरुआत में अपनी जमीन देने से मना कर दिया था, जिस वजह से सड़क का एलानमेंट बदलना पड़ा। डामरीकरण में मानकों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। बारिश की वजह से कहीं-कहीं डामर उखड़ सकता है। जिसे मानसून खत्म होने के बाद ठीक करा दिया जाएगा।

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