उत्तराखंड के इस गांव में आजादी के बाद पहली बार पहुंची बिजली, लोगों ने मनाया जश्न (Electricity in Sela village of Pithoragarh)
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Image: Electricity in Sela village of Pithoragarh

उत्तराखंड के इस गांव में आजादी के बाद पहली बार पहुंची बिजली, लोगों ने मनाया जश्न

पिथौरागढ़ के इस गांव के अंदर तो दिवाली जैसा खुशनुमा माहौल अभी से देखने को मिल रहा है। आजादी के 70 सालों के बाद पहली बार यह गांव बिजली से जगमगा उठा है-

शहरों में ऐसी कितनी सुविधाएं हैं जो हमारे लिए बेहद आम है। हम पक्की सड़कों पर चल सकते हैं, हम जब चाहे इंटरनेट से कुछ भी इंफॉर्मेशन निकाल सकते हैं। सब हम तक कितनी आसानी से पहुंच रहा है। सबसे मूलभूत जरूरत बिजली की बात करें तो जहां तक विकास पहुंच गया है उन जगहों में बिजली की आपूर्ति होना बेहद मामूली चीज है। मगर अब भी उत्तराखंड के कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां शहरों में मूलभूत जरूरत समझी जाने वाली चीज एक बेशकीमती चीज है। एक पल को आप यह सोचें कि उत्तराखंड में अभी भी कई गांव ऐसे हैं जहां पर बिजली नहीं आती। जहां के लोगों ने आज तक कभी भी एक बल्ब तक को जलते हुए नहीं देखा। जहां के लोगों को यह नहीं पता कि बिजली का होना आखिर क्या होता है। कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसे गांव के अंदर हैं, जहां पर दशकों से बिजली नहीं आई है। शायद इस बात की कल्पना मात्र से ही हम सिहर उठें। मगर कड़वा सच तो यह है कि जिसकी कल्पना मात्र से ही हम डर रहे हैं उसको कई उत्तराखंड के लोग हकीकत में जी रहे हैं। जी हां, राज्य में अब भी कई गांवों में दशकों से बिजली नहीं आ पाई है

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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित चीन से सटी दारमा घाटी का एक ऐसा ही गांव है जहां पर आजादी के 70 सालों के बाद भी बिजली नहीं पहुंच पाई थी। वहां के लोग बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से कई दशकों से वंचित थे। मगर आखिरकार उस गांव में भी बिजली पहुंच गई है जिससे ग्रामीणों के बीच जश्न का माहौल छा गया है। पिथौरागढ़ के दारमा घाटी का सेला गांव घाटी का पहला ऐसा गांव है जहां बिजली आखिरकार लोगों तक पहुंच ही गई है। भले ही हम सब के लिए दिवाली आने में समय हो, मगर इस गांव के अंदर तो दिवाली अभी से देखने को मिल रही है। जी हां, दिवाली जैसा ही कुछ जश्न भी लोगों के बीच देखने को मिल रहा है और आखिर ऐसा हो भी क्यों ना। आखिरकार आजादी के 70 सालों के बाद पहली बार यह गांव बिजली से रोशन हो गया है। दिवाली से पहले गांव में विद्युत आपूर्ति बहाल होने से ग्रामीणों के बीच हर्ष का माहौल है। दारमा घाटी में सवा करोड़ की लागत से 50 किलोवाट की परियोजना का निर्माण किया गया है। इस परियोजना से केवल सेला गांव में बिजली की आपूर्ति आखिरकार सुचारू कर दी गई है। आजादी के लगभग 7 दशकों के बाद दारमा घाटी का सेला गांव आखिरकार बिजली से जगमगा उठा जिससे वहां पर लोगों का खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

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पिथौरागढ़ में चीन की सीमा से सटी दारमा घाटी में जलविद्युत परियोजना का निर्माण बीते 2011 में उरेडा ने शुरू किया था। 2013 में भीषण आपदा के चलते उपकरण क्षतिग्रस्त होने से परियोजना शुरू नहीं हो पाई थी। इसके बाद अब आखिरकार गांव में आजादी के 70 सालों के बाद लोगों को बिजली जैसी मूलभूत सुविधा मिल पाई है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने दारमा घाटी के अन्य गांवों को भी बिजली से जोड़ने की मांग की है। बता दें कि लंबे समय से चीन सीमा से सटे दारमा और व्यास घाटियों के कई गांव ऐसे हैं जहां पर अब तक लोगों को बिजली जैसी मूलभूत सुविधा नहीं मिल पाई है और अब तक बिजली सुचारू रूप से नहीं पहुंच पाई है। दारमा घाटी में 50 किलोवाट की जलविद्युत परियोजना बनने से सेला गांव विद्युत आपूर्ति से जोड़ने वाला दारमा घाटी का पहला गांव बन गया है। परियोजना के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि जल्दी दारमा घाटी के अन्य गांव में भी विद्युत आपूर्ति बहाल होगी। वहीं सेला गांव के ग्रामीणों ने 70 सालों के बाद अपने गांव में पहली बार बिजली आने के बाद अपनी खुशी जाहिर की है और उन्होंने उरेडा विभाग और सरकार का आभार जताया है।

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