हरिद्वार कुंभ: अद्भुत है किन्नर अखाड़ा..जानिए महाकाल के अघोर साधकों की खास बातें (Know all about Kinnar AKHADA)
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हरिद्वार कुंभ: अद्भुत है किन्नर अखाड़ा..जानिए महाकाल के अघोर साधकों की खास बातें

उज्जैन कुंभ से अस्तित्व में आए और प्रयागराज कुंभ से मजबूत बनकर उभरे किन्नर अखाड़े ने तेजी से अपना विस्तार किया है। आज हरिद्वार में जूना, किन्नर और अग्नि अखाड़ा की सामूहिक पेशवाई निकाली जाएगी।

साल 2019...प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर हुआ महाकुंभ एक नए अध्याय का साक्षी बना। यहां पहली बार किन्नर अखाड़े ने पेशवाई जुलूस निकाला। पेशवाई जुलूस निकाल कर किन्नर अखाड़े ने इतिहास रच दिया था। कुंभ में ऐसा पहली बार हुआ था, जब 13 की जगह 14 अखाड़ों को पेशवाई का अधिकार मिला। चौदहवें अखाड़े के रूप में किन्नर अखाड़े को शामिल किया गया था। आज धर्मनगरी हरिद्वार में भी किन्नर अखाड़े की पेशवाई निकाली जाएगी। गुरुवार को जूना और अग्नि अखाड़ा की सामूहिक पेशवाई निकाली जाएगी। इनकी पेशवाई में किन्नर अखाड़ा भी साथ चलेगा। इससे पहले उज्जैन के सिंहस्थ कुंभ में भी किन्नर अखाड़े ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।

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किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी हरिद्वार पहुंच चुकी हैं। यहां किन्नर अखाड़े की देवत्व यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह है। लंबे समय तक समाज से दूर रहे किन्नर संत मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं और अब उनके शिविर में आशीर्वाद लेने वालों का तांता लगा रहता है। अलग पहचान के साथ जूना का हिस्सा बन चुके किन्नर अखाड़े के संत वैसे तो महाकाल के उपासक हैं, लेकिन कुछ संत अघोर साधना भी करते हैं। इस साधना को बहुत कठिन माना जाता है। उज्जैन कुंभ से अस्तित्व में आए और प्रयागराज कुंभ से मजबूत बनकर उभरे किन्नर अखाड़े ने तेजी से अपना विस्तार किया है। अखाड़ा परिषद ने मान्यता देने से इनकार किया तो किन्नर अखाड़े ने जूना अखाड़े संग जुड़कर अपना अलग अस्तित्व बनाए रखा।

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हरिद्वार में किन्नर अखाड़े की पेशवाई को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह है। किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि बदलाव ही प्रकृति का नियम है। किन्नर समाज के प्रति लोगों को भी अपना नजरिया बदलने की जरूरत है। क्योंकि किन्नर भी समाज का हिस्सा हैं। किन्नर समाज पहले बेटी और फिर गाय की पूजा करता है। आचार्य महामंडलेश्वर ने कहा कि प्रेम ही एक-दूसरे को जोड़ता और मिलाता है। जिसे प्रेम करना न आया हो वह मनुष्य ही नहीं है। प्रेम ही चट्टान जैसे व्यक्ति को मोम बना देता है। बता दें कि आचार्य महामंडलेश्वर आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी भरतनाट्यम में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। उन्होंने ‘मि हिजड़ा’ और ‘मि लक्ष्मी’ जैसी किताबें लिखी हैं। उनकी तीसरी किताब ‘मि एंड धर्मा’ जल्द ही बाजार में आने वाली है।

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